नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक की विदेश यात्राओं पर केंद्र सरकार ने करीब 557.51 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में यह जानकारी दी। सरकार के अनुसार, इस अवधि के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 77 देशों की यात्रा की। इन यात्राओं के दौरान विभिन्न देशों के साथ हुए समझौतों और बातचीत से कई क्षेत्रों में भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में मदद मिली।
राज्यसभा में विदेश यात्राओं का खर्च बताया
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद वी. सिवदासन के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़ी जानकारी सदन में रखी। विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए 35 पन्नों के जवाब में यात्राओं पर हुए खर्च और विभिन्न देशों के साथ हुए समझौतों का विवरण दिया गया है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2021 से जुलाई 2026 के बीच प्रधानमंत्री ने कुल 77 देशों का दौरा किया। इन यात्राओं के दौरान कई देशों के साथ समझौते किए गए और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
इजरायल यात्रा पर खर्च हुए करीब 11.92 करोड़ रुपये
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 और 26 फरवरी 2026 को हुई इजरायल यात्रा पर सरकार ने करीब 11.92 करोड़ रुपये खर्च किए।
इसी तरह 15 से 20 मई 2026 के दौरान फ्रांस और स्लोवाक गणराज्य की यात्रा पर करीब 4.77 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं 27 से 29 जून 2026 के बीच सेशेल्स यात्रा पर सरकार का खर्च करीब 8.22 करोड़ रुपये रहा।
2025 में फ्रांस और अमेरिका की यात्रा पर भी हुआ खर्च
सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 में हुई विदेश यात्राओं का खर्च भी राज्यसभा में बताया। 10 से 13 फरवरी 2025 के दौरान फ्रांस की यात्रा पर करीब 25.59 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि इसी अवधि में अमेरिका की यात्रा पर करीब 16.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों में अलग-अलग यात्राओं पर हुए खर्च का विवरण शामिल है। इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में सुरक्षा, परिवहन, प्रतिनिधिमंडल और अन्य व्यवस्थाओं पर बड़ी राशि खर्च होती है।
विदेश यात्राओं के दौरान हुए 316 समझौते
विदेश मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2021 से जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग देशों के साथ कुल 316 समझौता ज्ञापन किए गए। इन समझौतों के जरिए व्यापार, निवेश, सुरक्षा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।
सरकार के अनुसार, इस अवधि में भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करीब 381.8 अरब डॉलर रहा। विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और इन समझौतों को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है।
संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस के साथ सबसे ज्यादा समझौते
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 316 समझौता ज्ञापनों में से 44 समझौते संयुक्त अरब अमीरात के साथ किए गए। वहीं फ्रांस के साथ 33, इजरायल के साथ 16 और अमेरिका के साथ 8 समझौते हुए।
इनमें अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े समझौते शामिल हैं। सांसद वी. सिवदासन ने इजरायल के साथ हुए समझौतों में सुरक्षा सेवा से सहयोग और एक भुगतान प्रणाली पर यूपीआई लागू करने से जुड़े समझौते का भी उल्लेख किया।
विदेश यात्राओं के परिणामों पर भी उठे सवाल
सांसद वी. सिवदासन ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और उनसे जुड़े समझौतों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने कितने देशों का दौरा किया या कितने समझौते किए।
उनके अनुसार, यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है कि इन यात्राओं से देश को वास्तविक रूप से क्या हासिल हुआ। इसमें परियोजनाओं का क्रियान्वयन, निवेश में बढ़ोतरी, रोजगार के अवसर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत होने जैसे परिणाम शामिल हैं।
विदेश यात्राओं के खर्च और उपलब्धियों पर बहस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय रही हैं। सरकार इन यात्राओं को भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत करने और दूसरे देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताती रही है। वहीं विपक्षी दल यात्राओं पर होने वाले खर्च और उनसे हासिल होने वाले वास्तविक लाभ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
अब राज्यसभा में सामने आए आंकड़ों के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और उनसे मिले आर्थिक व कूटनीतिक लाभ को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। सरकार के अनुसार इन यात्राओं के जरिए भारत ने कई देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है, जबकि विपक्ष का जोर इन यात्राओं के ठोस परिणामों के आकलन पर है।

