नई दिल्ली. देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने और उसकी प्रगति पर नियमित नजर रखने के लिए केंद्र सरकार ने पहली बार सेवा उत्पादन सूचकांक जारी किया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने इस नई व्यवस्था के तहत अप्रैल 2026 का पहला परीक्षण आंकड़ा जारी किया है। इससे हर महीने औपचारिक सेवा क्षेत्र की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।
19 प्रमुख सेवा क्षेत्रों को किया गया शामिल
सरकार ने इस सूचकांक में फिलहाल 19 प्रमुख सेवा क्षेत्रों को शामिल किया है। यह देश के औपचारिक सेवा क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। इसका आधार वर्ष 2024-25 रखा गया है।
मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में इसमें और क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद यह सूचकांक देश के लगभग 85 से 90 प्रतिशत औपचारिक सेवा क्षेत्र को शामिल करेगा।
अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बढ़ोतरी
अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार 19 में से 14 सेवा क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। बाकी अधिकांश क्षेत्रों में भी सकारात्मक बढ़ोतरी देखने को मिली।
सबसे तेज़ वृद्धि होटल और भोजन सेवाओं में दर्ज की गई, जहां 37.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद खुदरा व्यापार में 30.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
उद्योगों पर नहीं बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ
सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि इस सूचकांक को तैयार करने के लिए उद्योगों या कारोबारियों से अलग से कोई जानकारी नहीं मांगी गई है। इसे पूरी तरह सरकारी विभागों और वस्तु एवं सेवा कर के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। इससे कारोबारियों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि यह सूचकांक केवल सेवा क्षेत्र के उत्पादन को दर्शाता है। इसे देश की सकल घरेलू उत्पाद की गणना से सीधे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
लोगों से मांगे जाएंगे सुझाव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभी परीक्षण के तौर पर जारी किया गया सूचकांक है। इसे और बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इन सुझावों के आधार पर इसमें आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
अर्थव्यवस्था को समझने में मिलेगी मदद
मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि इसे अंतिम सूचकांक नहीं माना जाना चाहिए। इसे सार्वजनिक करने का उद्देश्य इसकी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना और लोगों की राय लेना है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इसमें नए सेवा क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, यह देश की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश करने में और अधिक उपयोगी साबित होगा।
हर महीने मिलेगी सेवा क्षेत्र की जानकारी
सरकार का कहना है कि यह नया सूचकांक नीति बनाने, आर्थिक गतिविधियों का आकलन करने और सेवा क्षेत्र की स्थिति को समय-समय पर समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके आंकड़े ई-सांख्यिकी पोर्टल पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आम लोग और शोधकर्ता भी इनका उपयोग कर सकें।
