नई दिल्ली. संसद के Monsoon Session 2026 से पहले केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नई दिल्ली स्थित आवास पहुंचे, जहां National Democratic Alliance (NDA) के मंत्रियों और दोनों सदनों के फ्लोर लीडर्स की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसून सत्र के दौरान सरकार की विधायी रणनीति तय करना और संसद में पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा करना था।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि विपक्ष के संभावित मुद्दों का किस तरह प्रभावी तरीके से जवाब दिया जाए और संसद के दोनों सदनों में सरकार की रणनीति को मजबूती से लागू किया जाए।
इन अहम विधेयकों को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार के विधायी एजेंडे में सबसे पहले दो लंबित विधेयकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 और Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 शामिल हैं। इनमें से शिक्षा से जुड़ा विधेयक पहले ही लोकसभा में पेश किया जा चुका है और फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (Joint Committee) के पास विचाराधीन है।
पांच नए बिल भी ला सकती है सरकार
सरकार मानसून सत्र के दौरान पांच नए विधेयक भी संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। इनमें Income-tax (Amendment) Bill, 2026 और Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 प्रमुख हैं, जिन्हें मौजूदा अध्यादेशों की जगह लाया जाएगा।
इसके अलावा Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026, Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 और Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) Development (Amendment) Bill, 2026 भी सरकार के एजेंडे में शामिल हैं। माना जा रहा है कि इन विधेयकों का उद्देश्य प्रशासनिक सुधार, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना और उद्योगों को अधिक सुविधा उपलब्ध कराना है।
विपक्ष भी तैयार कर रहा है अपनी रणनीति
दूसरी ओर, विपक्षी दल भी मानसून सत्र को लेकर सक्रिय हो गए हैं। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता 20 जुलाई, यानी सत्र के पहले दिन बैठक करेंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार के विधायी एजेंडे की समीक्षा की जाएगी और उन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाई जाएगी जिन्हें विपक्ष संसद में प्रमुखता से उठाना चाहता है।
हंगामेदार रहने के आसार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों के कारण काफी अहम रहने वाला है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा। ऐसे में आगामी संसद सत्र के दौरान तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

