.नई दिल्ली. महाराष्ट्र सरकार अपनी नई किसान कर्जमाफी योजना के दायरे को और व्यापक बनाने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार अब उन करीब 5.75 लाख किसानों को भी योजना का लाभ देने पर विचार कर रही है, जो वर्ष 2017 और 2019 की कर्जमाफी योजनाओं से किसी कारणवश वंचित रह गए थे। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कृषि विभाग को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य पर बढ़ेगा 1,400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ
कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यदि इन अतिरिक्त किसानों को योजना में शामिल किया जाता है तो राज्य सरकार पर लगभग 1,400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। गौरतलब है कि सरकार पहले ही ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना 2026’ के लिए 36,585 करोड़ रुपये का प्रावधान कर चुकी है। ऐसे में नए लाभार्थियों को शामिल करने पर कुल खर्च और बढ़ जाएगा।
विपक्ष के आरोपों के बाद बढ़ी हलचल
हाल के दिनों में विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने सरकार की नई कर्जमाफी योजना की पात्रता शर्तों को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि कई जरूरतमंद और संकटग्रस्त किसान योजना के लाभ से बाहर रह जाएंगे। इसी बीच कृषि मंत्री Dattatraya Bharne ने भी संकेत दिया था कि सरकार पात्रता नियमों की समीक्षा करने के लिए तैयार है ताकि अधिक से अधिक किसानों को राहत मिल सके।
शिवसेना मंत्री ने उठाया मुद्दा
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक के दौरान एक शिवसेना मंत्री ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2017 और 2019 की कर्जमाफी योजनाओं में कई पात्र किसान शामिल नहीं हो पाए थे, इसलिए उन्हें नई योजना में अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को सभी पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने को कहा।
55 लाख से ज्यादा किसानों को पहले ही मिलेगा लाभ
2 जून को राज्य कैबिनेट ने 36,585 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना’ को मंजूरी दी थी। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से लगभग 55.72 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
किन किसानों को मिलेगा कर्जमाफी का लाभ?
योजना के तहत 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए फसल ऋणों को शामिल किया गया है। 30 सितंबर 2025 तक जिन किसानों पर फसल ऋण का बकाया रहेगा, उन्हें अधिकतम 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी दी जाएगी। इसके अलावा जो किसान नियमित रूप से ऋण चुकाते रहे हैं, उन्हें 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
2 लाख से अधिक कर्ज वालों के लिए क्या है व्यवस्था?
यदि किसी किसान पर 2 लाख रुपये से अधिक का बकाया फसल ऋण है, तो उसे पहले 2 लाख रुपये से ऊपर की राशि का भुगतान करना होगा। इसके बाद सरकार उसके 2 लाख रुपये तक के बकाया ऋण को माफ करेगी। योजना में भूमि स्वामित्व की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिससे छोटे और बड़े दोनों किसान लाभ उठा सकेंगे।
कुछ पुराने लाभार्थियों को भी मिलेगा फायदा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि महात्मा ज्योतिराव फुले शेतकरी कर्जमुक्ती योजना के तहत सहायता प्राप्त कर चुके और बाद में फिर से बकाया ऋण वाले किसानों को भी कुछ शर्तों के साथ लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा पुनर्गठित (Restructured) ऋण वाले किसानों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है।
कौन नहीं होगा पात्र?
योजना के तहत कुछ वर्गों को लाभ से बाहर रखा गया है। 25 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी, आयकरदाता, 25 हजार रुपये से अधिक मासिक पेंशन पाने वाले लोग, वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधि तथा सरकारी कर्मचारी इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।
किसान संगठनों ने उठाई मांग
Raju Shetti ने सरकार से मांग की है कि कर्जमाफी का लाभ सभी किसानों को दिया जाए। उनका कहना है कि योजना में अत्यधिक शर्तें लगाने से कई जरूरतमंद किसान बाहर रह जाएंगे। वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष Harshvardhan Sapkal ने भी पात्रता मानकों की आलोचना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में संकटग्रस्त किसान योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
किसानों को बड़ी राहत देने की तैयारी
यदि सरकार 5.75 लाख अतिरिक्त किसानों को शामिल करने का फैसला करती है तो यह महाराष्ट्र की हालिया सबसे बड़ी किसान राहत पहलों में से एक होगी। इससे हजारों करोड़ रुपये के कृषि ऋण बोझ से जूझ रहे किसानों को राहत मिलने की संभावना है और राज्य में कर्जमाफी को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को भी नई दिशा मिल सकती है।
