नई दिल्ली: देश में बढ़ती आबादी, कृषि गतिविधियों और पशुधन की संख्या के कारण आने वाले वर्षों में जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। केंद्र सरकार ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2050 तक सिंचाई के लिए पानी की मांग 807 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) तक पहुंच सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने जल बजटिंग (Water Budgeting) को जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण उपकरण बताया है।
कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा जल उपभोक्ता
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार ग्रामीण भारत में कुल जल खपत का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र में उपयोग होता है। इसके अलावा पशुधन की बढ़ती संख्या के कारण पीने के पानी और चारे के उत्पादन के लिए भी जल की मांग लगातार बढ़ रही है।
मंत्रालय ने बताया कि National Commission for Integrated Water Resources Development के अनुमानों के मुताबिक 2050 तक सिंचाई जल की मांग 807 BCM तक पहुंच सकती है।
जल संसाधनों पर बढ़ेगा दबाव
मंत्रालय का कहना है कि भविष्य के ये अनुमान जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव की ओर संकेत करते हैं। इसी वजह से अब केवल जल आपूर्ति बढ़ाने की बजाय मांग आधारित जल प्रबंधन रणनीति अपनाने की जरूरत है, जिसमें पानी के कुशल उपयोग और दीर्घकालिक योजना पर विशेष ध्यान दिया जाए।
भारत में कितनी है जल उपलब्धता?
Central Water Commission के आकलन के अनुसार भारत में हर वर्ष औसतन 3,880 BCM वर्षा होती है। हालांकि वाष्पीकरण और अन्य प्राकृतिक कारणों से होने वाली हानि के बाद देश में वार्षिक जल उपलब्धता लगभग 1,999.20 BCM रह जाती है।
भूजल स्तर में गिरावट बनी चिंता
मंत्रालय ने कहा कि सीमित जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। इसके साथ ही मौसमी जल संकट और जल बंटवारे को लेकर विवादों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
जल बजटिंग को बनाया जा रहा अहम हथियार
इन चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल बजटिंग को नीति स्तर पर प्राथमिकता दी है। इस प्रक्रिया के तहत किसी गांव, जलग्रहण क्षेत्र, ब्लॉक या जिले में उपलब्ध जल और उसकी खपत का आकलन किया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इससे फसल योजना बनाने, सिंचाई दक्षता बढ़ाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप जल प्रबंधन रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है।
अटल भूजल योजना से मिल रहे सकारात्मक परिणाम
मंत्रालय ने बताया कि Atal Bhujal Yojana के तहत सामुदायिक भागीदारी आधारित भूजल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2019 में शुरू की गई यह योजना सात राज्यों के 229 भूजल संकटग्रस्त ब्लॉकों में लागू की गई है।
योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में वार्षिक जल बजट तैयार करना अनिवार्य किया गया है। वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान किए गए आकलन में 229 में से 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया।
हजारों जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण
मार्च 2026 तक योजना के तहत लगभग 81,700 जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण या पुनर्स्थापन किया जा चुका है। वहीं सहभागी ग्राम पंचायतों में 8,203 जल बजट तैयार किए गए हैं।
तकनीक की मदद से होगा बेहतर जल प्रबंधन
जल शक्ति मंत्रालय ने ‘वरुणी’ नामक वेब एप्लीकेशन के उपयोग पर भी जोर दिया है। यह प्लेटफॉर्म वर्षा, भूमि उपयोग, फसल पैटर्न, जनसंख्या और जल संसाधनों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्लॉक स्तर पर जल बजट तैयार करता है।
यह प्रणाली स्थानीय प्रशासन और समुदायों को बेहतर जल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है।
जल सुरक्षा के लिए अभी से तैयारी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशकों में पानी की मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जल बजटिंग और तकनीक आधारित प्रबंधन जैसे उपाय देश की जल सुरक्षा मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

