नई दिल्ली. चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार की ओर से 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के Duty-Free Import की अनुमति देने और जमाखोरी पर सख्ती के बाद थोक बाजार में चीनी के दाम करीब 15 प्रतिशत तक गिर गए हैं। पिछले तीन दिनों में थोक कीमतों में लगभग 800 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है। हालांकि, इसका फायदा अभी सीधे आम ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है और खुदरा बाजार में चीनी करीब 75 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है।
थोक कीमत करीब 62 रुपये किलो, और गिरावट की उम्मीद
बाजार से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, चीनी की Wholesale Price अब करीब 62 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। आने वाले दिनों में इसमें करीब 3 रुपये प्रति किलो की और कमी आने की संभावना जताई जा रही है। कोल्हापुर के एक कारोबारी के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में फैक्ट्री स्तर पर चीनी की कीमत करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल कम हुई है और आने वाले दिनों में दाम और नरम हो सकते हैं।
सरकार के पास 36 लाख टन चीनी का स्टॉक
केंद्र सरकार के अनुसार, देश में इस समय करीब 36 लाख टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। सरकार का अनुमान है कि मौजूदा स्टॉक और Duty-Free Sugar Imports मिलकर नई Sugar Crushing Season शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होंगे। नई पेराई का सीजन शुरू होने के बाद बाजार में चीनी की नई सप्लाई आने लगेगी, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ने की उम्मीद है।
जमाखोरी और Stock Manipulation पर सरकार की नजर
चीनी की कीमतों में अचानक हुई तेजी के बाद केंद्र सरकार ने Sugar Stock Monitoring बढ़ा दी है। सरकार ने जमाखोरी और Stock Manipulation के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरकार का कहना है कि मौजूदा स्टॉक और प्रस्तावित आयात के बाद देश में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी और मांग को पूरा करने में परेशानी नहीं होगी।
Sugar Industry ने कहा- देश में चीनी की कमी नहीं
चीनी उद्योग की प्रमुख संस्था Indian Sugar & Bio-energy Manufacturers Association (ISMA) ने भी कहा है कि देश में वास्तव में चीनी की कोई कमी नहीं है। संगठन के मुताबिक, हाल में कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी सामान्य बाजार परिस्थितियों के कारण नहीं थी। Bulk Consumers की ओर से ज्यादा स्टॉक रखने और Speculative Behaviour को कीमतों में उछाल की प्रमुख वजह बताया गया है।
ISMA ने Retail Sugar Prices को तर्कसंगत बनाने की जरूरत बताई है और उम्मीद जताई है कि सरकार के कदमों के बाद आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में भी कमी आ सकती है।
Ethanol Production को चीनी महंगी होने की वजह मानने से इनकार
ISMA ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें चीनी की उपलब्धता कम होने के लिए Ethanol Production की ओर चीनी के डायवर्जन को जिम्मेदार बताया गया था। संगठन के अनुसार, अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के Ethanol Supply Year में गन्ने से अनुमानित 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन में से करीब 290 करोड़ लीटर ही सीधे गन्ने से जुड़ा था।
खुदरा बाजार में 75 रुपये किलो के आसपास दाम
थोक कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद Retail Market में चीनी अभी भी लगभग 75 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारोबारियों का कहना है कि खुदरा विक्रेताओं के पास पुराना स्टॉक मौजूद है, जिसे उन्होंने अधिक कीमत पर खरीदा था। जब यह महंगा स्टॉक खत्म होगा और कम कीमत वाली चीनी बाजार में आएगी, तब थोक कीमतों में आई गिरावट का असर धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
महंगी चीनी के कारण कई उपभोक्ता भी खरीदारी कम कर रहे हैं। बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक, कुछ ग्राहक पहले जहां 3 से 5 किलो चीनी खरीदते थे, वहीं अब कीमतों में और गिरावट की उम्मीद में केवल आधा या एक किलो चीनी खरीद रहे हैं।
किसानों के लिए भी अतिरिक्त भुगतान की मांग
इसी बीच Swabhimani Shetkari Sanghatana ने 2025-26 सीजन में पेराई किए गए गन्ने के लिए चीनी मिलों से किसानों को 300 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान करने की मांग की है। किसान संगठन का कहना है कि हाल में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से मिलों को जो अतिरिक्त लाभ मिला है, उसमें गन्ना किसानों को भी उचित हिस्सा मिलना चाहिए।

