नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है।
पुरी ने ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञ डॉ. फरीदुन फेशारकी के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार में मांग और आपूर्ति के रुझानों पर चर्चा की। इस दौरान कच्चे तेल, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। चर्चा में अमेरिका महाद्वीप में बढ़ते उत्पादन, दुनिया के कई बाजारों में मांग की धीमी वृद्धि और भू-राजनीतिक तनाव के असर पर विशेष ध्यान दिया गया।
वैश्विक तेल मांग में भारत की अहम भूमिका
हरदीप सिंह पुरी ने 24 अक्टूबर को एक पोस्ट में कहा कि भारत वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत और सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बना हुआ है। उनके मुताबिक, जहां उत्तर और दक्षिण अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, वहीं वैश्विक स्तर पर मांग में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित है।
इस स्थिति के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की बाधाएं ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा रही हैं। इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
उत्पादन बढ़ने के बावजूद कीमतों पर दबाव क्यों?
वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिलहाल दो अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। एक ओर उत्तर और दक्षिण अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति के नए स्रोत मजबूत हो रहे हैं। दूसरी ओर, कई बाजारों में ऊर्जा की मांग की वृद्धि धीमी बनी हुई है।
हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव इस संतुलन को प्रभावित कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास किसी भी तरह की बाधा से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ता है।
पुरी और फेशारकी के बीच हुई बातचीत में इन सभी कारकों के साथ उन परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक तेल और गैस बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।
भारत के लिए क्यों अहम हैं ये घटनाक्रम?
भारत वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का एक प्रमुख केंद्र है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला बदलाव देश की ऊर्जा लागत और आयात से जुड़े खर्चों के लिए महत्वपूर्ण है।
पश्चिम एशिया में तनाव और प्रमुख समुद्री मार्गों पर व्यवधान की आशंका भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता को भी अहम बनाती है। हालांकि, पुरी ने अपनी पोस्ट में इस व्यवधान के कारण आपूर्ति में कितनी कमी आई है या तेल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है, इसका कोई विशिष्ट आंकड़ा नहीं दिया।
मंत्री ने फेशारकी के साथ अपनी बातचीत को उन विभिन्न कारकों के आकलन के रूप में पेश किया, जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
