नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ रिट याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोलकाता में I-PAC कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के परिसरों में कोयला चोरी घोटाले की जांच के दौरान ED अधिकारियों के साथ धमकियां और उत्पीड़न किया गया।
ED का कहना: अवैध अवरोधन और उत्पीड़न
ED ने कहा कि यह याचिका कोलकाता में किए गए छापे के दौरान ED अधिकारियों के काम में अवरोध और उत्पीड़न के खिलाफ दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री इस अवरोध में शामिल रहे।
याचिका में मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप
केंद्रीय जांच एजेंसी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस प्रमुख DGP राजीव कुमार ने खोज अभियान में अवरोध किया। याचिका में CBI से FIR दर्ज करने और जांच करने की मांग की गई है। यह आरोप लगभग 2,742 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले से जुड़े हैं।
याचिका के अनुसार, 8 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और 100 से अधिक पुलिसकर्मी प्रतीक जैन के निवास में घुसे और ED द्वारा जब्त की गई लैपटॉप, मोबाइल और दस्तावेज़ एक ट्रक में ले गए।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया कैवेट
10 जनवरी को पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैवेट दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि राज्य की दलीलों को सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए। कैवेट का उद्देश्य अदालत से यह सुनिश्चित कराना होता है कि बिना पक्ष को सुने कोई विपरीत आदेश न जारी किया जाए।
ED ने की I-PAC और प्रतीक जैन के परिसरों में छापेमारी
ED ने 8 जनवरी को I-PAC कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापे मारे। एजेंसी का दावा है कि ममता बनर्जी ने छापे की साइट पर प्रवेश कर महत्वपूर्ण सबूतों को जब्त किया।
I-PAC ने ED छापों की निंदा की
I-PAC ने कहा कि यह जांच एजेंसी “अशांतिपूर्ण मिसाल” स्थापित कर रही है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे पूरी तरह सहयोग करेंगे और कानून के अनुरूप प्रक्रिया में भाग लेते रहेंगे।
I-PAC ने कहा कि हम कभी चुनाव नहीं लड़ते और न ही राजनीतिक पद रखते हैं। हमारा कार्य केवल पारदर्शी और पेशेवर राजनीतिक परामर्श देना है, जो राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित नहीं है।

