नई दिल्ली. देश की राजनीति में इन दिनों INDIA Bloc और NDA के बीच सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच महाराष्ट्र की NCP (Sharad Pawar) को लेकर सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी BJP के नेतृत्व वाले National Democratic Alliance (NDA) का हिस्सा बन सकती है। इस चर्चा को उस समय और हवा मिली जब पार्टी के सभी आठ लोकसभा सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात को NDA में शामिल होने का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
PM Modi से मुलाकात के बाद बढ़ी राजनीतिक अटकलें
NCP (SP) की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के आठ सांसदों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद में Delimitation Bill को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा NDA से बाहर के दलों के सांसदों के साथ मुलाकातों का सिलसिला भी जारी है, जिसके चलते इस बैठक को राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि NCP (SP) ने अब तक NDA में जाने की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। पार्टी की ओर से पहले भी BJP के साथ जाने या कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज किया गया है। सुप्रिया सुले ने जुलाई में कहा था कि NCP (SP) और कांग्रेस के बीच किसी तरह की Merger Talks नहीं चल रही हैं और दोनों दल सहयोगी के तौर पर काम कर रहे हैं।
NDA में जाने की चर्चा के पीछे क्या है वजह?
NCP (SP) को लेकर राजनीतिक अटकलों का एक बड़ा कारण पार्टी के भीतर संभावित मतभेदों की खबरें हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पार्टी के कुछ सांसद और विधायक विपक्ष में बने रहने के बजाय NDA के साथ जाने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। इसके पीछे Political Stability, Development Funds और 2029 Lok Sabha Election की संभावनाओं को भी एक कारण बताया जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इन दावों को स्वीकार नहीं किया गया है।
महाराष्ट्र में NCP की राजनीति पहले ही दो हिस्सों में बंट चुकी है। अजित पवार के नेतृत्व वाला NCP धड़ा पहले से ही BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाला NCP (SP) विपक्षी खेमे में है। ऐसे में अगर NCP (SP) भी NDA के साथ आती है तो महाराष्ट्र की State Politics में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
Delimitation Bill ने बढ़ाई राजनीतिक अहमियत
NCP (SP) का रुख Delimitation Bill को लेकर भी चर्चा में है। सुप्रिया सुले ने पहले संकेत दिया था कि यदि प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि की जाती है, तो उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अंतिम निर्णय INDIA Bloc के सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा।
इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ NCP (SP) सांसदों की बैठक को केवल एक सामान्य मुलाकात के बजाय संसद के मौजूदा Political Deadlock और Delimitation जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
क्या NDA में शामिल होगी NCP (SP)?
फिलहाल इसका सीधा जवाब है—ऐसा कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। NCP (SP) की ओर से NDA में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी के भीतर एकजुटता को लेकर भी सुप्रिया सुले ने पहले कहा था कि पार्टी के सभी सांसद और विधायक साथ हैं और कोई भी बड़ा फैसला सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
राजनीतिक रूप से देखें तो NDA में जाने का फैसला NCP (SP) के लिए आसान नहीं होगा। पार्टी लंबे समय से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ INDIA Bloc में है। वहीं शरद पवार की राजनीतिक विरासत और महाराष्ट्र में पार्टी के संगठन को देखते हुए ऐसा कोई भी फैसला राज्य की राजनीति पर सीधा असर डाल सकता है।
INDIA Bloc के लिए भी अहम होगा फैसला
अगर भविष्य में NCP (SP) NDA के साथ जाने का फैसला करती है तो इसका असर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे INDIA Bloc Unity को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर NDA को महाराष्ट्र में एक और मजबूत राजनीतिक आधार मिल सकता है।
हालांकि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे NDA Switch से ज्यादा राजनीतिक अटकलों और संभावित समीकरणों के रूप में देखना उचित होगा। प्रधानमंत्री से NCP (SP) सांसदों की मुलाकात जरूर हुई है, लेकिन इससे पार्टी के गठबंधन बदलने की पुष्टि नहीं होती। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व का आधिकारिक रुख ही साफ करेगा कि यह मुलाकात महज संसदीय मुद्दों तक सीमित थी या महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े Political Realignment की शुरुआत।
