नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। दोनों देशों ने 17 जून 2026 को इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह किसी यूरोपीय या पश्चिमी देश के साथ भारत का पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता होगा, जो पूरी तरह से लागू होने जा रहा है।
करीब 14 दौर की लंबी वार्ताओं के बाद मई 2025 में दोनों देशों ने इस समझौते पर सहमति बनाई थी। इसके बाद 25 जुलाई 2025 को लंदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब दोनों देशों द्वारा समझौते की पुष्टि (Ratification) पूरी होने के बाद इसे 15 जुलाई से लागू किया जाएगा।
भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए अवसर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाजार में अभूतपूर्व अवसर मिलेंगे। भारत के लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन में बिना किसी शुल्क बाधा के प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इससे वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ होगा। लंबे समय से इन उत्पादों पर लगने वाले ऊंचे आयात शुल्क खत्म होने से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
किन उत्पादों पर खत्म होगा ब्रिटेन का शुल्क
एफटीए लागू होने के बाद ब्रिटेन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले कई आयात शुल्कों को शून्य कर देगा। प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर 70 प्रतिशत तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5 प्रतिशत तक, इंजीनियरिंग वस्तुओं और ऑटो कंपोनेंट्स पर 18 प्रतिशत तक, चमड़ा और फुटवियर पर 16 प्रतिशत तक तथा टेक्सटाइल और कपड़ों पर 12 प्रतिशत तक का शुल्क समाप्त हो जाएगा।
इसके अलावा रसायन और फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर लगने वाला 8 प्रतिशत तक का टैरिफ भी हटाया जाएगा। इससे भारतीय उद्योगों को ब्रिटेन के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
ब्रिटिश व्हिस्की और कारें होंगी सस्ती
समझौते के तहत भारत भी कई उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा। सबसे बड़ा बदलाव ब्रिटिश व्हिस्की पर देखने को मिलेगा। वर्तमान में लगभग 150 प्रतिशत आयात शुल्क वाली ब्रिटिश व्हिस्की पर टैरिफ घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही ब्रिटेन से आयात होने वाली कारों के लिए एक विशेष कोटा व्यवस्था लागू होगी। इस कोटा के तहत ब्रिटिश वाहनों पर 100 प्रतिशत की मौजूदा ड्यूटी के बजाय केवल 10 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इससे भविष्य में कुछ प्रीमियम ब्रिटिश कारों की कीमतों में कमी आ सकती है।
भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा का दावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि समझौते में संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। डेयरी, अनाज, तिलहन और सब्जी क्षेत्रों को संभावित आयात दबाव से बचाने के लिए कई उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है।
पीयूष गोयल ने कहा कि एफटीए की संरचना ऐसी बनाई गई है जिससे व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ भी है। इसके तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय कर्मचारी और उनके नियोक्ता तीन वर्षों तक सामाजिक सुरक्षा योगदान (सोशल सिक्योरिटी टैक्स) से मुक्त रहेंगे।
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से भारतीय कंपनियों को लगभग 4,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। वहीं भारतीय पेशेवरों को भी दोहरे सामाजिक सुरक्षा भुगतान के बोझ से राहत मिलेगी।
व्यापार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
ब्रिटेन के अनुमानों के अनुसार इस समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 5.1 अरब पाउंड और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को करीब 4.8 अरब पाउंड का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। दीर्घकाल में दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि होने की संभावना है।
भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों में चरणबद्ध तरीके से कटौती करेगा। इनमें से 85 प्रतिशत शुल्क अगले दस वर्षों के भीतर यानी 2036 तक पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे।
भारतीय स्टील उद्योग को भी राहत
समझौते में भारतीय स्टील निर्यातकों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। ब्रिटेन द्वारा 1 जुलाई से लागू किए जाने वाले नए स्टील नियमों और व्यापारिक उपायों से भारत के लगभग 85 प्रतिशत स्टील निर्यात को बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा अवशिष्ट कोटा और ऑथराइज्ड यूज स्कीम (AUS) जैसी व्यवस्थाओं के जरिए भारतीय स्टील उद्योग को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
30 अध्यायों वाला व्यापक समझौता
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) में कुल 30 अध्याय शामिल हैं। इनमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के अलावा सरकारी खरीद (Government Procurement), निवेश, पेशेवरों की आवाजाही और व्यापारिक सहयोग से जुड़े कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकारी खरीद संबंधी प्रावधान किसी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में पहली बार शामिल किया गया है।
क्या बदलेगा 15 जुलाई के बाद?
15 जुलाई से एफटीए लागू होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने लगेगी, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को ब्रिटिश व्हिस्की और कुछ वाहनों पर कम आयात शुल्क का लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

