नई दिल्ली. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) भारतीय किसानों, मछुआरों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए वैश्विक बाजारों के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि देश में रोजगार सृजन की गति भी तेज करेगा।
एक अंग्रेजी दैनिक में लिखे अपने लेख में मंत्री ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता 15 जुलाई से प्रभावी होने जा रहा है। यह समझौता भारत के लिए वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क खत्म करेगा ब्रिटेन
पीयूष गोयल ने कहा कि समझौते के लागू होते ही यूनाइटेड किंगडम भारतीय वस्तुओं के लिए लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। इससे भारतीय उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वस्त्र, चमड़ा, कृषि उत्पाद, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, हस्तशिल्प और अन्य कई क्षेत्रों के निर्यातकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक पहुंच मजबूत होगी और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
किसानों और कारीगरों के लिए नए अवसर
मंत्री ने कहा कि यह समझौता विशेष रूप से किसानों, मछुआरों, हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए लाभकारी साबित होगा।
ब्रिटेन जैसे बड़े और विकसित बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे कृषि आधारित उद्योगों और पारंपरिक हस्तशिल्प क्षेत्र को भी नया बाजार मिलेगा, जिससे लाखों लोगों की आय में वृद्धि हो सकती है।
भारतीय पेशेवरों को भी मिलेगा बड़ा लाभ
भारत-यूके समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक सुरक्षा समझौता यानी डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) भी है।
पीयूष गोयल ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में अस्थायी नियुक्ति पर जाने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) देने से छूट मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से 75 हजार से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से ज्यादा भारतीय कंपनियों को लाभ मिलने की संभावना है। इससे भारतीय कंपनियों की लागत कम होगी और वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
रोजगार सृजन को मिलेगी नई गति
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, व्यापार समझौते से निर्यात बढ़ने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन गतिविधियों में तेजी आएगी। इससे विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, कृषि प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है और ऐसे समझौते इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
घरेलू बाजार को भी मिलेगा संरक्षण
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि व्यापार समझौतों के बावजूद सरकार ने घरेलू उद्योगों और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा है।
उन्होंने कहा कि इन समझौतों के तहत घरेलू बाजार को चरणबद्ध तरीके से खोला गया है, ताकि भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इससे देश के आर्थिक हितों और उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
भारत-यूके CETA बनेगा नया मानक
मंत्री ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक संतुलित, महत्वाकांक्षी और न्यायसंगत व्यापार समझौते का उदाहरण है।
उनके अनुसार यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, रोजगार, नवाचार और आर्थिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वैश्विक बाजार में मजबूत होगी भारत की स्थिति
15 जुलाई से लागू होने वाला यह समझौता भारतीय निर्यातकों, उद्यमियों और पेशेवरों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ेगी, विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे।
इस तरह भारत-यूके CETA केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है, जो देश के विकास और रोजगार सृजन को नई दिशा दे सकता है।

