नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने नई दिल्ली में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
इस बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और नई आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से विचार साझा किए। उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और गहरा करना और नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशना था।
ऐतिहासिक ट्रेड डील के करीब भारत-अमेरिका
इस बीच अमेरिका की वरिष्ठ अधिकारी Bethany Poulos Morrison ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में दोनों देशों ने इस समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में औपचारिक पहल की थी और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
1.4 अरब लोगों का बाजार खुलेगा
मॉरिसन के अनुसार प्रस्तावित समझौता भारत के 1.4 अरब लोगों के विशाल बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए और अधिक सुलभ बनाएगा। यह समझौता “पारस्परिक और लाभकारी” शर्तों पर आधारित होगा, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।
‘Mission 500’ लक्ष्य की ओर कदम
उन्होंने बताया कि इस समझौते का एक बड़ा उद्देश्य दोनों देशों के बीच 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करना है, जिसे “Mission 500” के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
व्यापार आंकड़ों में वृद्धि
अमेरिकी पक्ष ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में भारत-अमेरिका वस्तु व्यापार 149 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी दौरान अमेरिका से भारत को होने वाले निर्यात में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
आर्थिक साझेदारी को नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच यह प्रस्तावित व्यापार समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करेगा। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि तकनीक, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत इस बात का संकेत है कि दोनों देश आर्थिक सहयोग को नए स्तर पर ले जाने के लिए गंभीर हैं। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
