नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी Crisil ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत का कमर्शियल व्हीकल (CV) उद्योग अगले दो वित्तीय वर्षों में मजबूत ग्रोथ के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, महामारी के बाद आई तेज रिकवरी के बाद अब वृद्धि की गति सामान्य होने लगेगी।
उत्पादन और ग्रोथ का अनुमान
वित्त वर्ष 2027 (FY27) तक कुल उत्पादन लगभग 12.4 लाख यूनिट तक पहुंचने का अनुमान
यह स्तर FY19 के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर जाएगा
FY26 में ग्रोथ लगभग 13% रहने की संभावना
FY27 में यह घटकर 5–6% तक स्थिर हो सकती है
ग्रोथ के प्रमुख कारण
Crisil के अनुसार इस तेजी के पीछे कई अहम फैक्टर हैं:
GST में कटौती (28% से घटाकर 18%) – सितंबर 2025 में लागू
कम ब्याज दरें (Lower interest rates)
मजबूत फ्रेट डिमांड (Freight demand)
इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग सेक्टर में तेजी
इन सभी कारणों ने वाहनों की मांग और अफोर्डेबिलिटी दोनों को बढ़ाया है।
घरेलू बाजार बना मुख्य आधार
भारत में 92% बिक्री घरेलू बाजार से आती है
एक्सपोर्ट पर अस्थायी दबाव, खासकर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण
हालांकि Crisil का कहना है कि मांग बनी रहेगी, केवल शिपमेंट में देरी हो सकती है
सेगमेंट वाइज परफॉर्मेंस
- Light Commercial Vehicles (LCV)
कुल बाजार का लगभग 60% हिस्सा
ग्रोथ अनुमान: 5–6%
ई-कॉमर्स और डिलीवरी नेटवर्क से मजबूत सपोर्ट - Medium & Heavy Commercial Vehicles (M&HCV)
ग्रोथ अनुमान: 4–5%
इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रेट मूवमेंट से सपोर्ट
लेकिन रेलवे लॉजिस्टिक्स से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है
- बस सेगमेंट
ग्रोथ अनुमान: 3–4%
सरकारी ई-मोबिलिटी और रिप्लेसमेंट डिमांड से सपोर्ट
इलेक्ट्रिक बसें अभी शुरुआती चरण में हैं
इंडस्ट्री आउटलुक
लागत दबाव और रेगुलेटरी अनुपालन से कुछ मार्जिन प्रेशर
लेकिन मजबूत कैश फ्लो और बैलेंस शीट से इंडस्ट्री स्थिर
क्रेडिट प्रोफाइल को Crisil ने “स्टेबल” बताया है
Crisil की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कमर्शियल व्हीकल सेक्टर आने वाले वर्षों में स्थिर और मजबूत विकास पथ पर बना रहेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और घरेलू मांग इस ग्रोथ के मुख्य आधार रहेंगे।
