नई दिल्ली. राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार (27 अप्रैल 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद उच्च सदन में AAP की संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गई है, जबकि NDA की स्थिति और मजबूत हो गई है।
किन नेताओं ने बदला पाला?
इस बड़े राजनीतिक कदम का नेतृत्व राघव चड्ढा ने किया। उनके साथ जिन प्रमुख सांसदों ने पार्टी छोड़ी, उनमें शामिल हैं:
संदीप पाठक
अशोक मित्तल
हरभजन सिंह
स्वाति मालीवाल
राजिंदर गुप्ता
विक्रमजीत साहनी
दो-तिहाई फॉर्मूला” से बचा दलबदल कानून
यह विलय बेहद रणनीतिक तरीके से किया गया ताकि संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) से बचा जा सके।
कुल 10 में से 7 सांसद (दो-तिहाई से अधिक) एक साथ गए
इसे “विलय” (merger) माना गया, न कि व्यक्तिगत दलबदल
इससे इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहा।
राघव चड्ढा का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि मैं सही व्यक्ति था, लेकिन गलत पार्टी में। AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने की बात भी कही।
राज्यसभा में क्या बदला?
BJP की संख्या बढ़कर लगभग 113 हो गई
NDA की प्रभावी ताकत करीब 148 पहुंच गई
AAP अब केवल 3 सांसदों तक सीमित
बचे हुए AAP सांसद:
संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और एक अन्य सदस्य हैं. इस बदलाव से सरकार के लिए अहम बिल पास कराना आसान हो सकता है।
AAP का विरोध और सुप्रीम कोर्ट का रुख
AAP ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा है और कहा कि यह विलय संवैधानिक रूप से गलत है। असली पार्टी (AAP) स्तर पर विलय होना चाहिए, सिर्फ संसदीय दल में नहीं। पार्टी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
BJP की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्षी गठबंधन INDIA पर हमला बोलते हुए कहा कि NDI Alliance शुरू से ही एक धोखा था संसद के अंदर ये सब ‘Best of Friends’ हैं।
राजनीतिक असर
AAP की राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ कमजोर
BJP/NDA को विधायी बढ़त
विपक्षी एकता पर सवाल
यह घटनाक्रम 2026 की भारतीय राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
