नई दिल्ली : फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक साझेदारी, विश्वास और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पर भारत का दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। “नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण” विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के परस्पर जुड़े हुए विश्व में मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव भरोसे पर टिकी है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से ‘मानवता सर्वोपरि’ के सिद्धांत पर चलने वाला देश रहा है। यही सोच भारत की विभिन्न वैश्विक पहलों में दिखाई देती है, जिनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शामिल हैं।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ भारत की वैश्विक सोच का आधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी ‘पूरा विश्व एक परिवार है’ के दर्शन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण भारत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे पहले सहायता पहुंचाने वाले देशों में शामिल रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीलंका में चक्रवात, अफगानिस्तान में भूकंप, मोजाम्बिक में बाढ़ और जमैका में आए तूफान जैसी आपदाओं के दौरान भारत ने बिना किसी भेदभाव के मानवीय सहायता उपलब्ध कराई।
समावेशी विकास का मॉडल दुनिया के सामने रखा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के समावेशी और सतत विकास मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के मंत्र के तहत भारत ने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान, तकनीक आधारित सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व वाले विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि विकास तभी प्रभावी होता है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
दाता-ग्राही नहीं, समान भागीदारी की जरूरत
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को केवल दाता और लाभार्थी के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक सहयोग समान भागीदारी, साझा जिम्मेदारी और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति सम्मान की कमी वैश्विक एकजुटता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। यदि विश्व समुदाय को स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करनी है, तो नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
शांति के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध और टकराव किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देकर ही स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
उन्होंने वैश्विक नेताओं से अपील की कि वे सहयोग, विश्वास और साझा विकास के मार्ग पर आगे बढ़ें ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक सुरक्षित, समावेशी और समृद्ध दुनिया का निर्माण किया जा सके।
G7 मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक में भागीदारी एक बार फिर वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। G7 के आउटरीच सत्र में भारत ने न केवल विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से रखा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग, समावेशन और मानव-केंद्रित विकास का संदेश भी दिया।
