कसुम्पटी (शिमला). कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस युवा विधायक अनिरूद्ध सिंह ने पंचायत टाइम्स से साझा किया कि ‘मेरी इच्छा है कि यहां पर बहुत बड़े कैंपस वाला स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय बनाया जाए, जिसमें विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हों. पेश है उनसे बातचीत के अंश……
प्रदेश में तो पहले से ही खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, इस विश्वविद्यालय में क्या खास रहेगा?
अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय में उपलब्ध हों. प्रदेश ही नहीं देश भर से खिलाड़ी यहां आकर हाई एल्टीटयूड क्षेत्र में प्रशिक्षण का लाभ उठाकर और अधिक कार्यकुशल बन सकते हैं. जिसका फायदा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों में हमारे खिलाड़ियों को मिलेगा.
आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेगी?
अपने पिछले कार्यकाल में इलाके की कुछ सड़कों की मैटलिंग का कार्य छूट गया है. प्राथमिकता पर मैटलिंग को पूरा करना है. साथ ही ऐसे निर्माणाधीन कार्य जिनको करवाने में फॉरेस्ट क्लीयरेंस आड़े आ रही है, उनको क्लीयरेंस दिलाना भी पहली प्राथमिकता रहेगी. क्लीयरेंस न मिलने से विधानसभा क्षेत्र में कई भवन व सड़कों के निर्माण कार्य लंबित पड़े हैं.
क्यों सरकार रिपीट नहीं कर पाई, बड़े-बड़े दिग्गज हार गए?
तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सरकार को रिपीट करवाने की पुरजोर कोशिश की. उन्होंने प्रदेश में अकेले कई रैलियां व प्रचार किया. प्रत्याशियों की अपनी ही कोई कमी रही होगी जो वह हारे हैं. कांग्रेस पार्टी के काम में कोई कमी नहीं रही. अब आधुनिक सूचना क्रांति का जमाना है पढ़े-लिखे लोग हैं, सोच परक कर ही अपने मत का इस्तेमाल करते हैं. जो काम करेगा वह जीतेगा जो नहीं करेगा उसे जनता सेवा का मौका नहीं देगी. मैं पहले जिला परिषद अध्यक्ष भी रहा हूं, दूसरी बार जनता ने ही विधायक बना कर भेजा है.
युवाओं के नेतृत्व को लेकर आपका क्या कहना है?
अब जमाना युवाओं का है. आपने देखा होगा इन चुनावों में भी युवा ही जीत कर आगे आए हैं. युवा आज तकनीक के जरिये काफी आगे बढ़ चुका है. युवाओं को युवा नेताओं से मिल-बैठकर अपनी समस्याओं और योजनाओं को लागू करना आसान प्रतीत होता है. जबकि बुजुर्गों के साथ जनरेशन गैप एक बड़ी बाधा रहती है. युवाओं के साथ युवा सोच व सहज भाव से अपनी बात को रख सकते हैं. इसलिए आने वाले वक्त में बिना युवाओं को साथ लिए चुनाव लड़ना व प्रगति करना किसी के लिए भी संभव न होगा.

अब आप विपक्ष में है, सरकार से कैसे सामजंस्य बिठाएंगे?
काम तो सभी के करने पड़ते है, चाहे जो मर्जी सरकार हो. बल्कि विपक्ष में रहकर ज्यादा काम होते हैं और सीखने को भी मिलता है. सभी विधायकों को विधायक निधि मिलती है, साथ ही सभी विधायक प्राथमिकता से तीन-तीन कार्य सरकार को करने पड़ते है. सभी विधायकों को करने ही पड़ते है.
जीत का श्रेय किसको देते है?
अपनी जीत का श्रेय सबसे पहले अपने भगवान को देता हूं. जिसके बाद समर्थकों को जिन्होंने अपना घर-बार छोड़कर एक महीना घर-घर जाकर मेरे लिए प्रचार किया मैं उनका तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं. मुख्यमंत्री वीरभद्र ने अभूतपूर्ण विकास के काम किए हैं. जिनकी बदौलत मुझे जीत मिली है.