नई दिल्ली: लोकसभा ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 को शुक्रवार को मौखिक मतदान से पारित कर दिया। सदन में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच यह विधेयक बिना चर्चा के ही पास हो गया। अब इस विधेयक को कानून बनने के लिए राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार है।
विपक्ष के हंगामे के बीच पास हुआ बिल
दोपहर में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भाजपा सांसद दिलीप सैकिया की अध्यक्षता में इस विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया। इस दौरान विपक्षी सांसद 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विरोध करते रहे और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करते हुए वेल में पहुंच गए। हंगामे के बीच ही बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
सरकार ने जताई नाराजगी
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के चर्चा में भाग नहीं लेने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने बहस से दूरी बनाई। रिजिजू ने कहा कि जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से संसद में चर्चा में भाग लेने की उम्मीद करती है। सदन की अध्यक्षता कर रहे दिलीप सैकिया ने भी बिना विपक्ष के सहयोग के बिल पारित होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
क्या हैं नए प्रावधान?
यह विधेयक Registration of Births and Deaths Act, 1969 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना और विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो साल से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो इसके लिए Judicial Magistrate First Class (JMFC) के आदेश की आवश्यकता होगी।
पहले क्या था नियम?
मौजूदा कानून के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक देरी से कराया जाता है, तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत Executive Magistrate की अनुमति से पंजीकरण किया जा सकता है। संशोधित कानून के तहत यह व्यवस्था दो साल तक की देरी वाले मामलों में लागू रहेगी, जबकि दो वर्ष से अधिक देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी।
कानूनी परिभाषाओं में भी बदलाव
विधेयक में कानूनी शब्दावली को भी अपडेट किया गया है। इसमें Code of Criminal Procedure (CrPC), 1973 के स्थान पर Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS), 2023 के अनुरूप Executive Magistrate की परिभाषा को संशोधित किया गया है।
राज्यसभा की मंजूरी बाकी
इस विधेयक को 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिली थी। लोकसभा से पारित होने के बाद अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। दोनों सदनों से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून लागू होगा।
इस मानसून सत्र में अब तक Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 और Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। वहीं Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 फिलहाल राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

