नई दिल्ली. भारत में एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) व्यवस्था जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत लागू की जाती है, जिसका उद्देश्य देश के जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभ को स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना है। इस व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी National Biodiversity Authority (NBA) और राज्य जैव विविधता बोर्डों की होती है।
विकास कार्यों में उपयोग की जाती है
सरकार के अनुसार, जब कोई कंपनी या संस्था औषधीय पौधों, बीजों, सूक्ष्म जीवों या अन्य जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग करती है, तो उसे ABS के तहत निर्धारित शुल्क या लाभ-साझेदारी राशि जमा करनी होती है। यह राशि सीधे स्थानीय निकायों और समुदायों के विकास कार्यों में उपयोग की जाती है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) का कहना है कि ABS प्रणाली से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल रही है और जैव संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकने में भी सहायता मिलती है।
ABS का विचार वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है और यह जैव विविधता संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों से जुड़ा हुआ है, जिसमें Convention on Biological Diversity (CBD) जैसे समझौते देशों को संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग और लाभ के समान वितरण के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
