नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ₹10,000 करोड़ तक के एकमुश्त बजटीय सहायता पैकेज को मंजूरी दी है। यह सहायता तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) को दी जाएगी ताकि एयरलाइंस के लिए विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
यह फैसला प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों के असर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सुरक्षित रखना है।
एयरलाइंस को मिलेगा ईंधन लागत में स्थिरता का लाभ
नागरिक उड्डयन मंत्री Ram Mohan Naidu Kinjarapu ने कहा कि यह कदम एयरलाइंस को ईंधन लागत में अनिश्चितता से राहत देगा और यात्रियों को भी किराए में स्थिरता का लाभ मिल सकता है। उन्होंने बताया कि पहले भी ECLGS योजना के तहत एयरलाइंस को लगभग ₹5,000 करोड़ की सहायता दी गई थी।
एटीएफ लागत एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च
मंत्रालय के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का लगभग 40% होता है, जो ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान 60% तक पहुंच सकता है। इसी कारण यह पैकेज बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
36 महीने तक लागू रहेगा समर्थन तंत्र
सरकार ने बताया कि एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट मैकेनिज्म 36 महीनों तक लागू रहेगा। इसके तहत हर वर्ष समीक्षा की जाएगी और योजना तब तक जारी रहेगी जब तक अग्रिम राशि पूरी तरह समायोजित नहीं हो जाती।
मॉनिटरिंग कमेटी करेगी निगरानी
इस योजना की निगरानी के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा व्यय विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति दावा सत्यापन और फंड के उपयोग की निगरानी करेगी।
राज्यों की भूमिका और टैक्स में राहत
मंत्री ने दिल्ली और महाराष्ट्र सरकारों द्वारा एटीएफ पर वैट घटाकर 7% किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के 75-80% एटीएफ की आपूर्ति इन्हीं राज्यों से होती है, जिससे यह कदम उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बनता है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर की उम्मीद
सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार और निर्यात जैसे क्षेत्रों को भी स्थिरता मिलेगी। इससे हवाई सेवाओं की निरंतरता और कार्गो संचालन में भी सुधार होगा।

