नई दिल्ली. राजस्थान की Bhajanlal Sharma Government ने पुलिस और आम जनता के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए गठित Community Liaison Group (CLG) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। गृह विभाग की नई अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी Political Party या उससे जुड़े संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी थाना एवं पंचायत स्तर पर बनने वाली CLG Committee का हिस्सा बन सकेंगे। इस फैसले के साथ ही वर्ष 2008 से लागू वह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है, जिसमें राजनीतिक दलों के सक्रिय सदस्यों के CLG में शामिल होने पर रोक थी।
18 साल पुरानी व्यवस्था हुई समाप्त
राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के तहत लागू Rule 12(5)(C) में स्पष्ट प्रावधान था कि Community Liaison Group पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहेगा और किसी राजनीतिक दल के सक्रिय सदस्य को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। अब इस नियम को निरस्त करने के बाद सभी राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ता और सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोग CLG सदस्य बनने के पात्र होंगे।
सरकार के इस फैसले को राज्य की पुलिस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण Policy Change माना जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर पुलिस और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद का दायरा बढ़ सकता है।
क्या होती है CLG और क्या है इसकी भूमिका?
Community Liaison Group (CLG) पुलिस और आम नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई जाती है। इसके सदस्य स्थानीय स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान सहयोग देने, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्यों में मदद करने तथा अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस को स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं।
राजस्थान में वर्तमान समय में सभी थानों और पंचायतों को मिलाकर 75 हजार से अधिक CLG Members सक्रिय हैं। नियमों के अनुसार प्रत्येक पंचायत में पांच और प्रत्येक थाना स्तर पर 30 सदस्यों के चयन का प्रावधान है। इनकी नियुक्ति संबंधित SHO और Circle Officer (CO) की अनुशंसा पर जिला Superintendent of Police (SP) द्वारा की जाती है।
फैसले के बाद तेज हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया
सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पुलिस की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है और राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ने की आशंका है।
वहीं भाजपा का कहना है कि CLG Committees में समाज के हर वर्ग के साथ-साथ राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों की भागीदारी भी होनी चाहिए, ताकि स्थानीय समस्याओं के समाधान में व्यापक सहयोग मिल सके। पार्टी का मानना है कि सकारात्मक सोच रखने वाले सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
क्या पुलिस की निष्पक्षता पर पड़ेगा असर?
नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब जिला पुलिस प्रशासन को CLG समितियों के गठन के दौरान संशोधित नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनानी होगी। कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी से कुछ मामलों में पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं और स्थानीय स्तर पर गुटबाजी बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।
दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग स्थानीय समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं और उनकी भागीदारी से Police-Public Coordination पहले से अधिक मजबूत हो सकता है।

