नई दिल्ली. UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR चार्ज को लेकर ग्राहकों पर संभावित असर के बारे में NPCI के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO दिलीप अस्बे ने अहम जानकारी दी है। 13वें SBI Banking & Economics Conclave 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि MDR वसूले जाने वाली कुल वैल्यू में से करीब 10 फीसदी हिस्से पर ही ग्राहकों से शुल्क वसूलने का वास्तविक जोखिम है। उनके मुताबिक ज्यादातर कारोबारी इस लागत को सीधे ग्राहकों पर डालने की संभावना नहीं रखते।
UPI की 75 फीसदी ट्रांजैक्शन वैल्यू चार्जिंग फ्रेमवर्क से बाहर
दिलीप अस्बे ने बताया कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 75 फीसदी हिस्सा मौजूदा चार्जिंग फ्रेमवर्क के बाहर है। इसका मतलब है कि UPI के बड़े हिस्से पर MDR नीति का सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि मर्चेंट पेमेंट्स में करीब 6 से 7 लाख करोड़ रुपये की राशि शामिल है और चार्जिंग फ्रेमवर्क मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर केंद्रित है।
अस्बे के अनुसार, QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले करीब 75 फीसदी मर्चेंट्स ने 2,000 रुपये से अधिक का ट्रांजैक्शन तकरीबन नहीं देखा है। ऐसे में MDR नीति का उन पर सीधा प्रभाव सीमित रहेगा।
बड़े कारोबारियों से आता है MDR का बड़ा हिस्सा
NPCI CEO ने बताया कि MDR से मिलने वाली कुल राशि का करीब 80 फीसदी हिस्सा उन कारोबारों से आता है, जिनका सालाना GMV और डिजिटल पेमेंट कलेक्शन 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है। ऐसे बड़े कारोबारी पहले से क्रेडिट कार्ड स्वीकार करते हैं और क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर अपेक्षाकृत अधिक शुल्क का भुगतान करते हैं।
इसी वजह से NPCI का आकलन है कि ऐसे कारोबारी UPI से जुड़े शुल्क को ग्राहकों पर डालने की संभावना कम रखते हैं। बाकी करीब 20 फीसदी MDR कलेक्शन में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों का हिस्सा करीब 10 फीसदी हो सकता है। इनमें से भी कई कारोबारी क्रेडिट कार्ड स्वीकार करते हैं।
सिर्फ 10 फीसदी हिस्से में ग्राहकों पर शुल्क का जोखिम
अस्बे ने माना कि MDR कलेक्शन के बाकी हिस्से में ग्राहकों पर शुल्क डालने की संभावना मौजूद हो सकती है। उन्होंने कहा कि बैंक, NPCI, अधिग्रहणकर्ता और पेमेंट एग्रीगेटर्स को यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना होगा कि MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए।
इस तरह NPCI के अनुमान के मुताबिक MDR से जुड़े कुल भुगतान मूल्य में करीब 10 फीसदी हिस्से में ही ग्राहकों पर शुल्क लगाए जाने का जोखिम है। हालांकि, यह एक आकलन है और वास्तविक प्रभाव कारोबारियों तथा पेमेंट सिस्टम में शामिल अन्य पक्षों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
इस साल UPI ट्रांजैक्शन में कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद?
UPI की भविष्य की वृद्धि पर बात करते हुए अस्बे ने कहा कि इस साल ट्रांजैक्शन वैल्यू में करीब 10 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि ट्रांजैक्शन की संख्या में 15 से 17 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने वृद्धि की रफ्तार में संभावित नरमी के पीछे UPI इकोसिस्टम में शुरुआती पांच-छह वर्षों की तुलना में निवेश कम होने को एक कारण बताया। उनके मुताबिक UPI के लिए लंबे समय तक अलग revenue model नहीं होने से इकोसिस्टम में शामिल कुछ संस्थाओं ने निवेश की गति कम की है। शिक्षा, जागरूकता और डिजिटल भुगतान को लेकर भरोसा भी इसकी वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक हो सकते हैं।
एक अरब यूजर्स तक UPI पहुंचाने का लक्ष्य
अस्बे ने कहा कि UPI का दीर्घकालिक उद्देश्य करीब एक अरब यूजर्स तक इसका इस्तेमाल बढ़ाना और ऐसा डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जो लोगों को आगे चलकर क्रेडिट, निवेश और बीमा जैसी वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध करा सके।

