नई दिल्ली: CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर बढ़े विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बोर्ड से COEMPT को दिए गए ठेके की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय ने टेंडर प्रक्रिया, कॉन्ट्रैक्ट आवंटन में अपनाई गई प्रक्रिया और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की पूरी जानकारी मांगी है।
यह कदम OSM पोर्टल पर छात्रों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद उठाया गया है। मंत्रालय कथित तौर पर यह जांच कर रहा है कि सेवा प्रदाता के चयन में सभी निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
अनियमितता मिलने पर अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में किसी प्रकार की प्रक्रियागत चूक या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय ने संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड भी तलब किए हैं।
मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट में COEMPT को ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता CBSE
जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के तहत CBSE के पास COEMPT को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार नहीं है। अगस्त 2025 में जारी मूल टेंडर में गंभीर लापरवाही या बार-बार नियम उल्लंघन की स्थिति में कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान था।
हालांकि सितंबर 2025 में जारी एक करिजेंडम के जरिए इस प्रावधान को हटा दिया गया। इसके बाद CBSE के पास केवल आर्थिक दंड लगाने, सुरक्षा जमा जब्त करने और कॉन्ट्रैक्ट समाप्त करने का अधिकार रह गया।
वित्तीय दंड का प्रावधान बरकरार
मौजूदा अनुबंध के अनुसार गंभीर तकनीकी समस्याओं के समाधान में देरी होने पर कंपनी पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षा जमा जब्त करने और बड़े उल्लंघनों की स्थिति में अनुबंध समाप्त करने का प्रावधान भी मौजूद है। लेकिन ब्लैकलिस्टिंग का विकल्प हटाए जाने से इस पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
OSM सिस्टम पर बढ़ी निगरानी
विवाद के बीच CBSE ने कहा है कि OSM पोर्टल की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों और IITs के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। बोर्ड के अनुसार कई तकनीकी कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा चुका है और सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया जारी है।
क्या है OSM विवाद?
विवाद तब शुरू हुआ जब कक्षा 12 के एक छात्र ने दावा किया कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान पोर्टल पर अपलोड की गई फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका उसकी नहीं थी। इसके बाद कई अन्य छात्रों ने भी इसी तरह की शिकायतें सामने रखीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक OSM प्रक्रिया में करीब 20 मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली जैसी गड़बड़ियां सामने आईं, जिसके बाद पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।
