नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतिहास रचते हुए इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। जकार्ता में सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने संबंधों को नई मजबूती देने की बात कही। उन्होंने दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझी सोच को इस रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत बताया।
भारत को बताया ‘लोकतंत्र की जननी’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत को “लोकतंत्र की जननी” बताते हुए कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार हैं, जिनके संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों पर आधारित हैं।
दो हजार साल पुराना है दोनों देशों का रिश्ता
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब दो हजार वर्षों से व्यापार, संस्कृति, धर्म और समुद्री संपर्क का मजबूत इतिहास रहा है। भारतीय महासागर के जरिए दोनों देशों के बीच विचारों, परंपराओं और व्यापार का आदान-प्रदान होता रहा, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाया।
उन्होंने कहा कि यही साझा विरासत आज भी दोनों देशों की दोस्ती की मजबूत नींव है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘एकता में विविधता’ का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने भारत के प्राचीन विचार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरा विश्व एक परिवार है) और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ‘भिन्नेका तुंग्गल इका’ (एकता में विविधता) का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की सोच एक जैसी है और यही मूल्य दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
व्यापार, निवेश और तकनीक में सहयोग बढ़ाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के विकसित भारत 2047 और इंडोनेशिया के गोल्डन इंडोनेशिया 2045 विजन के बीच कई समानताएं हैं। उन्होंने दोनों देशों से व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने से दोनों देशों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
ग्लोबल साउथ और इंडो-पैसिफिक पर भी दिया संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत बना सकते हैं। उन्होंने स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के लिए भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
रिश्तों का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ती साझेदारी दोनों देशों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्ते अब आधुनिक विकास और रणनीतिक सहयोग के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
