नई दिल्ली. भारत का क्रेडिट सिस्टम तेजी से बदल रहा है। हाल ही में जारी CRIF High Mark की रिपोर्ट के अनुसार, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (Non-Banking Financial Company) अब देश में नए क्रेडिट लेने वाले ग्राहकों (New-to-Credit – NTC) को दिए जाने वाले कुल कर्ज का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाल रही हैं। यह बदलाव भारत के वित्तीय ढांचे में एक बड़े संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है।
NTC (New-to-Credit) क्या होता है?
New-to-Credit (NTC) वे ग्राहक होते हैं जो:
पहली बार औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से लोन लेते हैं
जिनका पहले कोई क्रेडिट हिस्ट्री या क्रेडिट स्कोर नहीं होता
अक्सर छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं
यह वर्ग भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का सबसे अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
NBFCs क्यों बन गईं क्रेडिट ग्रोथ की अगुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, NBFCs की तेज वृद्धि के पीछे कई कारण हैं:
- तेज और आसान लोन प्रोसेस
NBFCs में लोन अप्रूवल प्रक्रिया बैंक की तुलना में काफी तेज है। - कम डॉक्यूमेंटेशन
छोटे और नए ग्राहकों के लिए आसान नियम बनाए गए हैं। - छोटे टिकट साइज लोन
₹5,000 से लेकर ₹50,000 तक के छोटे लोन आसानी से उपलब्ध हैं। - डिजिटल और फिनटेक मॉडल
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने ग्रामीण और छोटे शहरों तक पहुंच आसान बनाई है। - विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो
गोल्ड लोन
कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन
टू-व्हीलर लोन
माइक्रो बिजनेस लोन
पर्सनल लोन
इन सभी ने NBFCs को मजबूत पकड़ बनाने में मदद की है।
बैंकों की सतर्क रणनीति
Public Sector Banks और प्राइवेट बैंक इस समय NTC सेगमेंट में अपेक्षाकृत सतर्क हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
जोखिम प्रबंधन पर ज्यादा फोकस
पुराने और क्रेडिट हिस्ट्री वाले ग्राहकों को प्राथमिकता
शुरुआती लोन डिफॉल्ट के खतरे से बचाव
इस वजह से बैंक इस तेजी से बढ़ते सेगमेंट में NBFCs से पीछे रह गए हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहा क्रेडिट बेस
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े बताते हैं:
कुल क्रेडिट एक्टिव आबादी: 29 करोड़ (फरवरी 2026)
NTC ग्राहक: 4.4 करोड़
2022 में यह संख्या: 3.6 करोड़
यानी सिर्फ चार साल में 80 लाख से ज्यादा नए लोग औपचारिक क्रेडिट सिस्टम से जुड़े हैं।
NTC ग्राहक कितने रिस्की हैं? बड़ा खुलासा
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि:
67% NTC ग्राहक एक साल के भीतर
Low Risk
Very Low Risk
श्रेणी में आ जाते हैं
इसका मतलब है कि शुरुआती अनुमान के विपरीत, नए ग्राहक लंबे समय में काफी स्थिर और भरोसेमंद साबित होते हैं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
भारत के क्रेडिट सिस्टम में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है:
पहले: 33%
अब: 41%
महिलाएं विशेष रूप से सक्रिय हैं:
गोल्ड लोन में
घरेलू जरूरतों के लोन में
छोटे बिजनेस फाइनेंस में
यह बदलाव ग्रामीण और छोटे शहरों में आर्थिक स्वतंत्रता की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
ग्रामीण और छोटे शहरों में विस्तार
NTC लोन की सबसे बड़ी ग्रोथ:
टियर-2 और टियर-3 शहरों
ग्रामीण इलाकों
सेमी-अर्बन क्षेत्रों
में देखी जा रही है। डिजिटल लेंडिंग और आसान KYC प्रक्रियाओं ने इस विस्तार को संभव बनाया है।
बैंकों के लिए छूटा बड़ा अवसर
विशेषज्ञों के अनुसार, NBFCs जहां शुरुआती लीड ले चुकी हैं, वहीं बैंक अभी भी एक बड़े अवसर को पूरी तरह नहीं पकड़ पाए हैं।
NTC ग्राहक भविष्य में बन सकते हैं:
होम लोन ग्राहक
कार लोन लेने वाले
बड़े बिजनेस फाइनेंस के ग्राहक
यानी आज का छोटा लोन लेने वाला ग्राहक कल बैंक का सबसे मूल्यवान ग्राहक बन सकता है।
क्रेडिट सिस्टम में बड़ा संरचनात्मक बदलाव
भारत का क्रेडिट बाजार अब बदल रहा है:
पहले: पुराने और क्रेडिट हिस्ट्री वाले ग्राहक प्रमुख थे
अब: पहली बार लोन लेने वाले ग्राहक विकास का नया इंजन हैं
NBFCs इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, जबकि बैंक अभी संतुलित और सुरक्षित रणनीति अपना रहे हैं।
भारत का क्रेडिट इकोसिस्टम अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है।
NBFCs ने NTC सेगमेंट में मजबूत पकड़ बना ली है
बैंक अभी भी जोखिम से बचते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं
नए कर्ज लेने वाले ग्राहक भविष्य में बैंकिंग ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार बनेंगे
कुल मिलाकर, यह ट्रेंड भारत में वित्तीय समावेशन, डिजिटल लेंडिंग और क्रेडिट विस्तार की नई कहानी लिख रहा है, जो आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।
