नई दिल्ली. विवाद के बीच एनसीईआरटी ने शुक्रवार को एक कड़ी एडवाइजरी जारी कर कक्षा 8 की उस प्रतिबंधित सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को परिषद मुख्यालय में वापस करने को कहा है, जिसमें “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से जुड़ा अध्याय शामिल था।
सोशल मीडिया से भी हटाने का निर्देश
एनसीईआरटी ने अपने परामर्श में कहा कि अध्याय से संबंधित कोई भी सामग्री यदि सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की गई है, तो उसे तुरंत हटाया जाए।
इससे पहले Supreme Court of India ने पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े “आपत्तिजनक” अंशों को लेकर इसके प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि “गोली चल चुकी है और संस्था घायल है।”
शिक्षा मंत्रालय की कार्रवाई
प्रतिबंध के बाद Ministry of Education ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय को पत्र लिखकर डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर पुस्तक के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाने को कहा।
एनसीईआरटी की पूरी एडवाइजरी
एडवाइजरी में कहा गया:
“जिस किसी व्यक्ति या संगठन के पास एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ की प्रतियां हैं, वे उन्हें परिषद मुख्यालय में वापस करें। ‘Role of Judiciary in Our Society’ अध्याय से संबंधित सामग्री यदि सोशल मीडिया या किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई है, तो उसे जल्द से जल्द हटाया जाए।”
विवाद क्या था?
कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में कहा गया था कि न्यायपालिका के सामने भ्रष्टाचार, मामलों का भारी लंबित बोझ और न्यायाधीशों की कमी जैसी चुनौतियां हैं।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद एनसीईआरटी ने “अनुचित सामग्री” के लिए माफी मांगी है और कहा है कि पुस्तक को संबंधित प्राधिकरणों से परामर्श के बाद दोबारा लिखा जाएगा।
यह मामला शिक्षा सामग्री, अभिव्यक्ति की सीमाओं और संस्थागत गरिमा के संतुलन को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।
