नई दिल्ली. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने Meta India के अधिकारियों को एक बार फिर समन भेजा है। आयोग ने Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रमुख को कथित बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में औपचारिक जांच के लिए तलब किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को निर्धारित है।
मामले की जांच के लिए दोबारा बुलाया
NCPCR ने कथित बाल शोषण से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति और तथ्यों की जांच के लिए Meta India के वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा उपस्थित होने को कहा है। इससे पहले Meta India के प्रतिनिधि 9 सितंबर को आयोग के सामने पेश हुए थे।
आयोग अब मामले से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच करना चाहता है। इसके लिए Meta से संबंधित जानकारी और कंपनी की ओर से उठाए गए कदमों पर भी चर्चा हो सकती है।
NCPCR की कार्रवाई के बाद Meta ने बदली रिपोर्टिंग नीति
बाल सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर NCPCR की लगातार कार्रवाई के बीच Meta ने बाल यौन शोषण और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर अपनी नीति में बदलाव की सहमति जताई है।
केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद Meta ने ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकार का कहना है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक जरूरी शर्त है और इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
सरकार ने कहा- बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं
सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। सरकार के मुताबिक, Meta की ओर से बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने की सहमति इस दिशा में शुरुआती कदम है।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए अभी और कदम उठाने की जरूरत है।
दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी सरकार के रडार पर
केंद्र सरकार की बातचीत केवल Meta तक सीमित नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत की जा रही है। सरकार चाहती है कि प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए खतरा पैदा करने वाले और अन्य हानिकारक कंटेंट की पहचान कर उसे सक्रिय रूप से हटाने की व्यवस्था मजबूत करें।
इसका उद्देश्य ऐसे कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई को केवल शिकायत मिलने के बाद की प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय पहले से पहचान और रोकथाम की दिशा में ले जाना है।
लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के मामले में सक्रिय कदम उठाने का संदेश दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जो प्लेटफॉर्म बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में NCPCR की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि आयोग Meta India से कथित CSAM विज्ञापनों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उपायों पर विस्तृत जानकारी ले सकता है।

