नई दिल्ली: NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक की घटना ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सिस्टम को पूरी तरह “लीक-प्रूफ” बनाया गया था, उसी में सेंध लगने से सरकार और एजेंसियां हैरान हैं। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है और अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पूरी तरह सुरक्षित सिस्टम के बावजूद कैसे हुआ लीक?
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 2024 के विवाद के बाद परीक्षा सुरक्षा के लिए “कन्फिडेंशियल ऑपरेशंस (CONOPs)” नामक मजबूत प्रणाली लागू की थी। इसके तहत पेपर सेटिंग रूम को पूरी तरह सील किया गया था, जहां मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट जैसी सुविधाएं पूरी तरह प्रतिबंधित थीं।
इसके बावजूद, जांच में सामने आया है कि पेपर सेटिंग और ट्रांसलेशन प्रक्रिया से जुड़े कुछ अंदरूनी लोगों की भूमिका संदिग्ध है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की परतें कमजोर पड़ती दिखीं।
पेपर सेटिंग और ट्रांसलेशन प्रक्रिया पर सवाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस बार लीक पेपर सेटिंग के शुरुआती चरण में हुआ, जबकि 2024 में गड़बड़ी ट्रांसपोर्ट और वितरण चरण में सामने आई थी।
इस बार गिरफ्तार किए गए लोगों में पेपर ट्रांसलेटर्स और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन पर परीक्षा से पहले पेपर के कुछ हिस्से बाहर लीक करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि कुछ आरोपियों ने व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों से प्रश्न साझा किए।
CONOPs सिस्टम में कमजोरी के आरोप
2025 में लागू किए गए CONOPs सिस्टम को परीक्षा सुरक्षा का सबसे मजबूत ढांचा माना गया था। इसमें एयर-गैप्ड कंप्यूटर, दैनिक शेडिंग, सख्त निगरानी और पूरी तरह बंद वातावरण जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि 2026 में इस सिस्टम का पालन उतनी सख्ती से नहीं हो पाया, जिससे सुरक्षा में कमी आई। कई विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन के कारण सिस्टम की निगरानी कमजोर पड़ गई।
नेतृत्व बदलाव और प्रशासनिक गैप
रिपोर्ट में सामने आया है कि NTA में नेतृत्व बदलाव के चलते संवेदनशील समय में निगरानी कमजोर रही। पुराने अधिकारियों के जाने और नए नेतृत्व के आने के बीच महत्वपूर्ण अवधि में प्रशासनिक गैप पैदा हुआ, जिसका असर परीक्षा सुरक्षा पर पड़ा।
20 लाख से अधिक छात्रों पर असर
NEET-UG 2026 परीक्षा में देशभर के 20 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे। पेपर लीक की पुष्टि के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और अब दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है।
सरकार और एजेंसियों की सख्त कार्रवाई
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBI जांच के आदेश दिए। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं, ताकि “पेपर माफिया” को संदेश दिया जा सके कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे क्या?
NEET-UG की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है। अधिकारियों का कहना है कि नए सुरक्षा उपायों के साथ परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही पूर्व ISRO प्रमुख की अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिशों के आधार पर सिस्टम को और मजबूत करने पर काम चल रहा है।
