नई दिल्ली. नीति आयोग ने बुधवार को एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) 2024 का चौथा संस्करण जारी किया। यह सूचकांक भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात के लिए तैयारियों का व्यापक आकलन करता है और वैश्विक व्यापार में देश की भूमिका को मजबूत करने में राज्यों की बढ़ती अहमियत को रेखांकित करता है।
बड़े राज्यों में प्रदर्शन
बड़े राज्यों की श्रेणी में महाराष्ट्र ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके बाद तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा।
छोटे राज्यों, पूर्वोत्तर और केंद्र शासित प्रदेश
छोटे राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा गोवा को अग्रणी प्रदर्शनकर्ता के रूप में चिन्हित किया गया है।
नीति आयोग ने स्पष्ट किया कि इस सूचकांक में प्रयुक्त आंकड़े केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक संस्थानों जैसे आधिकारिक स्रोतों से लिए गए हैं। यह सूचकांक पारदर्शी और संकेतक-आधारित पद्धति पर तैयार किया गया है। आंकड़े फिलहाल अस्थायी हैं और आगे संशोधित किए जा सकते हैं।
चार स्तंभों पर आधारित सूचकांक
एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024 चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—
निर्यात अवसंरचना (Export Infrastructure)
बिजनेस इकोसिस्टम (Business Ecosystem)
नीति और शासन (Policy & Governance)
निर्यात प्रदर्शन (Export Performance)
इन चार स्तंभों को आगे 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों में विभाजित किया गया है, जिससे निर्यात तैयारियों का सूक्ष्म और नीतिगत रूप से उपयोगी विश्लेषण संभव हो सके।
2024 संस्करण में मैक्रो-आर्थिक स्थिरता, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, मानव संसाधन, वित्त तक पहुंच और MSME इकोसिस्टम जैसे नए आयामों को शामिल कर विश्लेषण को और गहराई दी गई है।
वेटेज की बात करें तो बिजनेस इकोसिस्टम को सबसे अधिक 40%, जबकि अन्य तीन स्तंभों को 20-20% वेटेज दिया गया है।
राज्यों का वर्गीकरण
तुलनात्मक अध्ययन और आपसी सीख के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बड़े राज्य, छोटे राज्य, पूर्वोत्तर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी में उन्हें लीडर, चैलेंजर और एस्पायरर के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
इस बार के संस्करण की एक खास बात जिलों पर विशेष फोकस है। सूचकांक का उद्देश्य राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर लागू करने योग्य रणनीतियों में बदलना है, ताकि स्थानीय क्षमताओं, औद्योगिक क्लस्टरों और वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सके।
2030 और 2047 के लक्ष्यों से जुड़ा सूचकांक
अगस्त 2020 में पहली बार पेश किया गया यह सूचकांक अब राज्यों और जिलों के स्तर पर निर्यात इकोसिस्टम की मजबूती, लचीलापन और समावेशिता को मापने का एक अहम टूल बन चुका है।
EPI 2024, भारत के 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट के लक्ष्य और विकसित भारत @2047 के दीर्घकालिक विजन के अनुरूप है।
नीति आयोग की टिप्पणी
सूचकांक जारी करते हुए नीति आयोग ने कहा कि भारत की निर्यात वृद्धि अब इस बात पर निर्भर करती जा रही है कि राज्य और जिले अवसंरचना, संस्थागत ढांचे और नीतिगत समर्थन के मामले में कितने तैयार हैं। यह इंडेक्स जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियों, विकास के अवसरों और नीतिगत सुधारों की पहचान करता है।
कार्यक्रम में नीति आयोग के सीईओ ने निर्यात अवसंरचना मजबूत करने, लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, मजबूत संस्थान बनाने और पारदर्शी व पूर्वानुमेय नीतिगत माहौल की जरूरत पर जोर दिया।
वहीं, सदस्य अरविंद विरमानी ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी ताकत पहचानें, संरचनात्मक कमियों को दूर करें और उभरते वैश्विक व्यापार अवसरों का लाभ उठाने के लिए लक्षित रणनीतियां बनाएं। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार दिए गए उत्पाद गुणवत्ता पर जोर को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का अहम स्तंभ बताया।
