नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में तनाव और Strait of Hormuz के आसपास पैदा हुई आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई सामान्य बनाए रखने की कोशिश की गई। सरकार के मुताबिक, देश के करीब 1.07 लाख रिटेल फ्यूल आउटलेट्स तक ईंधन की उपलब्धता बनाए रखी गई और किसी आउटलेट के पूरी तरह सूख जाने की स्थिति नहीं आई। LPG की सप्लाई पर जरूर आयात संबंधी दबाव रहा, लेकिन सरकार के अनुसार घरेलू बाजार में इसकी कमी नहीं होने दी गई।
Hormuz के रास्ते प्रभावित हुई LPG सप्लाई
भारत की LPG जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। खासतौर पर Hormuz के आसपास पैदा हुई बाधाओं का असर उन खेपों पर पड़ा, जो इस समुद्री मार्ग से भारत तक पहुंचती हैं। सरकार ने पहले बताया था कि संकट के दौरान भारत की LPG खपत का करीब 54 प्रतिशत हिस्सा Hormuz से होकर गुजरने वाले मार्ग पर निर्भर था। इसके बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही, बंदरगाहों पर उतारने और देश में वितरण को जारी रखा गया।
सरकार ने LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने समेत कई उपाय किए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संकट के दौरान घरेलू LPG उत्पादन को करीब 32 हजार टन प्रति दिन से बढ़ाकर 52 हजार टन प्रति दिन किया गया, जिससे आयात में आई बाधा के असर को कम करने में मदद मिली।
LPG की मांग ज्यादा, घरेलू उत्पादन सीमित
भारत में LPG की खपत घरेलू उत्पादन की तुलना में काफी अधिक है। यही वजह है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी बड़े व्यवधान का असर LPG लॉजिस्टिक्स पर जल्दी दिखाई देता है। Hormuz क्षेत्र में तनाव बढ़ने के दौरान आयातित LPG की उपलब्धता प्रभावित हुई, लेकिन सरकार ने सप्लाई चेन को चालू रखने के लिए वैकल्पिक इंतजामों और घरेलू उत्पादन बढ़ाने का सहारा लिया।
सरकार का दावा है कि इस अवधि में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सामान्य रही और LPG की bottling तथा distribution व्यवस्था भी जारी रही।
देशभर में ईंधन आउटलेट्स पर बनी रही सप्लाई
Hormuz व्यवधान के बीच भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की लगातार उपलब्धता बनाए रखना थी। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में बड़े स्तर पर समन्वय के जरिए ईंधन की supply chain को सक्रिय रखा गया।
भारतीय ध्वज वाले टैंकरों की आवाजाही भी जारी रही। सरकार के अनुसार, भारत ने Hormuz के जरिए LPG से लदे कई जहाजों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया और भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाया।
20वें Rozgar Mela में 51 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र
इसी बीच केंद्र सरकार ने 20वें Rozgar Mela के दौरान 19 सितंबर 2026 को देशभर में 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को appointment letters दिए। यह कार्यक्रम देश के 45 स्थानों पर आयोजित किया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसमें हिस्सा लिया।
इन नियुक्तियों के बाद Rozgar Mela के 20 संस्करणों के जरिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी संगठनों में appointment letters पाने वाले युवाओं की कुल संख्या करीब 12.75 लाख हो गई है।
कई मंत्रालयों और विभागों में हुई भर्तियां
20वें रोजगार मेले के तहत नियुक्त युवाओं को अलग-अलग केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में शामिल किया गया। इनमें Department of Revenue, Ministry of Railways, Ministry of Home Affairs, Ministry of Health and Family Welfare, Department of Financial Services और Ministry of Defence समेत कई संस्थान शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने नए कर्मचारियों को संबोधित करते हुए लगातार सीखने, नई तकनीक अपनाने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने पर जोर दिया। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि नए कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए Mission Karmayogi और iGOT Karmayogi जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।
Mission Karmayogi से सरकारी कर्मचारियों की ट्रेनिंग
Mission Karmayogi का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की skills और capabilities को मजबूत करना है। सरकार के मुताबिक, 1.7 करोड़ से ज्यादा सरकारी कर्मचारी iGOT Karmayogi platform से जुड़ चुके हैं। नए सरकारी कर्मचारियों के लिए Karmayogi Prarambh एक ऑनलाइन orientation programme के रूप में काम करता है।
इस व्यवस्था के जरिए कर्मचारियों को तकनीक, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और citizen-centric governance से जुड़े प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार, दोनों पर सरकार का फोकस
Hormuz व्यवधान ने भारत के लिए energy security और supply-chain resilience की अहमियत को सामने रखा। LPG के मामले में आयात पर निर्भरता के कारण दबाव बढ़ा, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को सक्रिय रखने से सरकार ने बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की।
दूसरी ओर, Rozgar Mela के जरिए सरकारी विभागों में नई नियुक्तियां जारी हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 20वें रोजगार मेले तक करीब 12.75 लाख appointment letters वितरित किए जा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में आए व्यवधान से निपटने की चुनौती रही, तो दूसरी तरफ सरकारी भर्तियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम भी जारी रहे।
