नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में Indian Administrative Service (IAS), Indian Forest Service (IFS) और Indian Police Service (IPS) अधिकारियों की कैडर स्ट्रेंथ कम करने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि राज्य में जरूरत की तुलना में All India Services के अधिकारियों की संख्या अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ सरकारी खर्च को कम करना है।
153 से 130 होगी IAS कैडर की संख्या
प्रस्ताव के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में IAS अधिकारियों की संख्या 153 से घटाकर 130 करने की योजना है। यानी कैडर में 23 पदों की कमी की जाएगी। वहीं IFS अधिकारियों की संख्या 118 से घटाकर 83 करने का प्रस्ताव है, जिससे 35 पद कम होंगे। IPS अधिकारियों की संख्या में कितनी कटौती की जाएगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
CM सुक्खू बोले- राज्य में जरूरत से ज्यादा अधिकारी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि हिमाचल में जितने अधिकारियों की जरूरत है, उससे कहीं अधिक अधिकारी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 153 IAS अधिकारी हैं, लेकिन इनमें से कई को अपेक्षाकृत छोटे विभागों में तैनात किया गया है, जहां उनकी विशेषज्ञता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि IAS कैडर की संख्या को 110 के आसपास लाया जाना चाहिए, लेकिन फिलहाल सरकार ने पहले चरण में इसे 153 से घटाकर 130 करने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि सरकार को अधिकारियों की बड़ी संख्या नहीं, बल्कि ऐसे अफसर चाहिए जो सरकारी नीतियों और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू कर सकें।
सरकार को 100 से 150 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद
CM सुक्खू के मुताबिक, IAS, IFS और IPS कैडर की संख्या कम करने से सरकार के Revenue Expenditure में करीब 100 से 150 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य को बड़ी संख्या में अधिकारियों की जरूरत नहीं है और उपलब्ध अधिकारियों का बेहतर इस्तेमाल प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकता है।
उन्होंने इस फैसले पर हो रही आलोचना को भी खारिज किया और कहा कि अधिकारियों की संख्या जरूरत से ज्यादा होने की स्थिति में सरकार को अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए।
IFS कैडर को पहले ही घटाया जा चुका है
मुख्यमंत्री ने बताया कि IFS कैडर की संख्या को पहले ही कम किया जा चुका है। प्रस्ताव के तहत अब इसे 118 से घटाकर 83 करने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही IPS कैडर में भी कटौती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार का मानना है कि प्रशासनिक जरूरत के मुताबिक अधिकारियों की संख्या तय करने से सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
All India Services अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अनुमति
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार All India Services Officers को Central Deputation पर जाने की अनुमति देने में देरी नहीं करेगी। अधिकारियों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने का विकल्प उपलब्ध कराया जाता रहेगा।
वर्तमान में 20 से अधिक IAS अधिकारी और एक दर्जन से ज्यादा IPS तथा IFS अधिकारी Deputation पर हैं। इनमें कुछ अधिकारी राज्य में ऐसे पदों पर भी तैनात हैं, जिन्हें उनके संबंधित कैडर पदों में शामिल नहीं माना जाता।
केंद्र को जल्द भेजा जाएगा औपचारिक प्रस्ताव
राज्य सरकार अब IAS, IFS और IPS अधिकारियों की कैडर स्ट्रेंथ में प्रस्तावित बदलाव को लेकर केंद्र सरकार को जल्द Formal Proposal भेजने की तैयारी कर रही है। अंतिम बदलाव के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी होगी।
सरकार केंद्र से यह अनुरोध भी कर सकती है कि हिमाचल प्रदेश में भविष्य में जरूरत से अधिक केंद्रीय सेवा अधिकारियों की तैनाती न की जाए। अधिकारियों के मुताबिक, एक अधिकारी पर Salary, Dearness Allowance, Attached Staff और अन्य सुविधाओं समेत सालाना करीब 40 से 50 लाख रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में कैडर स्ट्रेंथ में बदलाव को सरकार खर्च घटाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

