नई दिल्ली. भारत के Oilmeal Export सेक्टर के लिए मई 2026 राहत भरा रहा। मई में देश से कुल 3.73 लाख टन Oilmeal का निर्यात हुआ, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले 18.41 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल में लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परेशानियों और कमजोर शिपमेंट के बाद मई में Export में आई यह तेजी उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इस बढ़ोतरी में Rapeseed Meal की बढ़ती मांग की अहम भूमिका रही, खासकर China जैसे प्रमुख एशियाई बाजार से मिले मजबूत ऑर्डर्स ने भारतीय निर्यातकों को सहारा दिया।
Rapeseed Meal बना Oilmeal Export की बड़ी ताकत
मई के Export आंकड़ों में Rapeseed Meal और Soybean Meal के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां Rapeseed Meal की मांग मजबूत बनी हुई है, वहीं Soybean Meal को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। China इस समय भारतीय Rapeseed Meal का एक प्रमुख खरीदार बनकर उभरा है, जिससे भारत के कुल Oilmeal Export Volume को बढ़ाने में मदद मिली है।
दूसरी ओर, भारतीय Soybean Meal exporters के सामने Brazil और Argentina जैसे South American देशों की चुनौती बढ़ गई है। इन देशों से मिलने वाली प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण वैश्विक खरीदारों के लिए भारतीय Soybean Meal की कीमत आकर्षक बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, Feed Ingredients की बदलती वैश्विक मांग ने भी Soybean Meal के Export पर दबाव बढ़ाया है।
अप्रैल-मई में कुल Export अभी भी पिछले साल से कम
मई में शानदार प्रदर्शन के बावजूद चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों का कुल आंकड़ा अभी पिछले साल के मुकाबले कमजोर है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत ने कुल 7.39 लाख टन Oilmeal Export किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 7.81 लाख टन था। यानी इस अवधि में कुल निर्यात में 5.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट की मुख्य वजह अप्रैल का कमजोर प्रदर्शन रहा, जब Oilmeal Export में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज हुई थी। हालांकि मई में Export में आई तेजी ने इस नुकसान को कुछ हद तक कम किया है।
Red Sea Crisis और Freight Cost बनी बड़ी चुनौती
भारतीय Oilmeal Exporters के लिए सिर्फ वैश्विक मांग ही चुनौती नहीं है। High Freight Cost और Red Sea में जारी Shipping Disruptions के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत बढ़ी हुई है। समुद्री मार्ग में व्यवधान के चलते कई शिपमेंट को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों के Transport Expenses बढ़ रहे हैं और Profit Margins पर दबाव पड़ रहा है।
दूर के बाजारों तक भारतीय Oilmeal पहुंचाना पहले की तुलना में महंगा हो गया है। इसका सीधा असर भारतीय उत्पादों की Price Competitiveness पर पड़ता है। ऐसे में Exporters को एक तरफ South American suppliers से कीमत की चुनौती मिल रही है, तो दूसरी तरफ बढ़ती Freight Cost उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रही है।
Soybean Meal के लिए बढ़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा
भारत के Soybean Meal Export की स्थिति फिलहाल Rapeseed Meal की तुलना में कमजोर दिखाई दे रही है। Brazil और Argentina जैसे बड़े Soybean-producing देशों की मजबूत Supply और प्रतिस्पर्धी कीमतों ने भारतीय निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह बनाए रखना कठिन कर दिया है।
Global Feed Market में खरीदार कीमत और उपलब्धता को लेकर काफी संवेदनशील हैं। ऐसे में यदि South American suppliers कम कीमत पर Soybean Meal उपलब्ध कराते हैं, तो भारतीय उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है। आने वाले महीनों में Soybean prices, global supply और international demand इसके Export performance के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।
China की मांग पर रहेगी नजर
भारतीय Oilmeal Export के लिए आने वाले महीनों में China की Rapeseed Meal Demand सबसे महत्वपूर्ण factors में से एक हो सकती है। मई में चीन से मिली मजबूत मांग ने Export Volume को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अगर यह demand आगे भी बनी रहती है, तो भारत के Rapeseed Meal Export को मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा Chinese Import Policy में होने वाला कोई भी बदलाव भारतीय Exporters के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। China भारतीय Rapeseed Meal का बड़ा बाजार बना रहता है, इसलिए वहां के Import Rules और खरीदारी के रुझान पर उद्योग की नजर रहेगी।
Oilseed Production और मौसम भी अहम
भारत के Oilmeal Export का भविष्य घरेलू Oilseed Production से भी जुड़ा हुआ है। देश में Rapeseed और Soybean जैसी Oilseeds की उपलब्धता और कीमत सीधे तौर पर Processing और Export Cost को प्रभावित करती है। चूंकि Oilseed Cultivation काफी हद तक Weather Conditions पर निर्भर करती है, इसलिए आने वाले महीनों में मानसून और फसल उत्पादन की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
यदि घरेलू स्तर पर Oilseed Production बेहतर रहता है और कच्चे माल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय Exporters को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर उत्पादन में कमी या कीमतों में तेज बढ़ोतरी Export Margins पर दबाव डाल सकती है।
आगे कैसी रहेगी Oilmeal Export की तस्वीर?
मई 2026 के आंकड़े भारतीय Oilmeal Industry के लिए सकारात्मक संकेत जरूर देते हैं, लेकिन अप्रैल-मई का कुल Export अभी भी पिछले वर्ष से नीचे है। ऐसे में आने वाले महीनों में China की Rapeseed Meal Demand, Global Oilmeal Prices, South American Competition, Domestic Oilseed Production और Shipping Freight Rates पर खास नजर रहेगी।
अगर Rapeseed Meal की मांग मजबूत बनी रहती है और Shipping Disruptions कम होते हैं, तो भारत के Oilmeal Export में आगे और सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि Soybean Meal को लेकर वैश्विक बाजार में मौजूद Price Competition भारतीय Exporters के लिए बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।
