नई दिल्ली: चुनाव आयोग की ओर से किए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एक बार फिर संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक INDIA ब्लॉक के दल लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उनके खिलाफ हटाने का प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रहे हैं। प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और इसे आने वाले दिनों में, संभवतः अगले सप्ताह, पेश किया जा सकता है।
यह विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए की जा रही पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले भी विपक्षी सांसदों ने इस संबंध में नोटिस दिए थे। 12 मार्च 2026 को 130 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक नोटिस लोकसभा में दिया गया था, जबकि 24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने भी हटाने की मांग वाला नोटिस दिया था। मौजूदा पहल को SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सामने आई नई रिपोर्टों के बाद की गई कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
SIR को लेकर EC के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट
इस पूरे विवाद को उस रिपोर्ट के बाद और जोर मिला जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों से बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ ऐसे फैसलों पर भी सवाल उठाए जिनके बारे में कथित तौर पर उनका कहना था कि वे उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए। मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने तथा SIR से जुड़े प्रक्रियात्मक बदलाव भी कथित आपत्तियों के दायरे में बताए गए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों की उस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया है कि आयोग में अंतिम फैसलों को लेकर विभाजन था। आयोग की ओर से कहा गया है कि आधिकारिक निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और व्यक्तिगत स्तर पर हुई चर्चा या विचार-विमर्श को आयोग के अंतिम रुख के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
संसद में फिर उठेगा CEC को हटाने का मुद्दा
विपक्ष की नई पहल में ताजा घटनाक्रम और SIR से जुड़ी रिपोर्टों को आधार बनाए जाने की बात सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और विपक्षी दल दोनों सदनों में इसे आगे बढ़ाने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से संपर्क भी किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी है। हालांकि, प्रस्ताव कब औपचारिक रूप से दाखिल होगा और संसद में इसकी आगे की प्रक्रिया क्या होगी, यह संबंधित संसदीय प्रक्रिया और आवश्यक समर्थन पर निर्भर करेगा।
प्रियंका गांधी ने भी उठाए सवाल
इसी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों का उल्लेख करते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित तौर पर हस्तक्षेप करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके ये बयान कांग्रेस और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे राजनीतिक अभियान का हिस्सा हैं।
SIR को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ा
SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है और ज्ञानेश कुमार के हटने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ बीजेपी ने चुनाव आयुक्तों के बीच विचारों में अंतर को संस्थागत चर्चा का हिस्सा बताया है और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे में नए इम्पीचमेंट प्रस्ताव की तैयारी से संसद और चुनाव आयोग के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच भी यह मुद्दा आने वाले दिनों में और प्रमुख हो सकता है। प्रस्ताव का मसौदा अंतिम रूप लेने और नोटिस दाखिल होने के बाद ही इसके आरोपों और संसदीय प्रक्रिया की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।

