नई दिल्ली. झारखंड आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Padma Bhushan Award से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में प्रदान किया गया।
इस अवसर पर शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। यह सम्मान उन्हें आदिवासी समाज, झारखंड राज्य आंदोलन और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया है।
Shibu Soren Legacy: संघर्ष से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। बचपन में उनका नाम शिवलाल था, लेकिन बाद में वे “Shibu Soren” के नाम से पहचाने गए। उनके जीवन की दिशा तब बदल गई जब उनके पिता सोबरन सोरेन की 1957 में महाजनों द्वारा हत्या कर दी गई। इस घटना ने उन्हें सामाजिक शोषण और land rights के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
Tribal Movement और Jharkhand Movement में भूमिका
युवावस्था में उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित करने के लिए कई संगठन बनाए, जिनमें संताल नवयुवक संघ और सोनोत संताल समाज प्रमुख रहे। उन्होंने “Dhan Katni Andolan” जैसे आंदोलनों के जरिए आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को मजबूत किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात विनोद बिहारी महतो और एके राय से हुई, जिसके बाद 1973 में Jharkhand Mukti Morcha (JMM) की स्थापना हुई।
Social Reform और “Disom Guru” की पहचान
टुंडी और आसपास के क्षेत्रों में शिबू सोरेन ने ग्रामीण विकास, सामूहिक खेती, पशुपालन और रात्रि पाठशालाओं जैसी पहल शुरू की। उनकी नेतृत्व शैली और सामाजिक हस्तक्षेप के कारण वे आदिवासी समाज में “Disom Guru” के नाम से प्रसिद्ध हुए।
Political Career: MP से CM तक का सफर
शिबू सोरेन ने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
1980: पहली बार लोकसभा सांसद (दुमका)
कई बार संसद सदस्य रहे
2005, 2008 और 2009 में झारखंड के मुख्यमंत्री बने
झारखंड राज्य गठन (2000) के बाद राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई
हालांकि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता के कारण बार-बार प्रभावित हुए।
National Politics में प्रभाव
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद उन्होंने दुमका सीट से जीत दर्ज की, जो उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है।
बाद में वे राज्यसभा सांसद भी रहे और झारखंड की राजनीति में सक्रिय बने रहे।
शिबू सोरेन का निधन और एक युग का अंत
लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु को झारखंड आंदोलन और आदिवासी राजनीति के एक युग का अंत माना गया।
मरणोपरांत सम्मान: पद्म भूषण पुरस्कार 2026
अब मरणोपरांत Padma Bhushan Award मिलने के साथ ही उनके जीवन और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक मान्यता मिली है। यह सम्मान केवल एक राजनीतिक नेता को नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन के प्रतीक को दिया गया सम्मान माना जा रहा है।
नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका संघर्ष आज भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक तक पहुंचकर इतिहास में दर्ज हो गया है।

