नई दिल्ली. राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को हुई कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक में कर्मचारियों, श्रमिकों, किसानों, उद्योगों और पर्यावरण से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, कानून मंत्री जोगाराम पटेल और उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने प्रेस वार्ता कर सरकार के फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने नई वेतन संहिता 2026 को मंजूरी देने के साथ ही आगामी पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी।
साल में दो बार बदलेगी न्यूनतम मजदूरी
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्थान वेतन संहिता 2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए वैज्ञानिक व्यवस्था लागू की जाएगी। श्रमिकों की मजदूरी में साल में दो बार संशोधन किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार हर साल 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा और संशोधन किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे श्रमिकों को महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप उचित मजदूरी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
कर्मचारियों को वेतन पर्ची देना जरूरी होगा
नई वेतन संहिता के तहत सभी कर्मचारियों को वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों को उनके वेतन, कटौती और अन्य भुगतान का स्पष्ट विवरण मिल सकेगा।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों को अपने वेतन से जुड़ी जानकारी आधिकारिक रूप से उपलब्ध होगी।
सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम
नई व्यवस्था में कर्मचारियों के काम के घंटे भी तय किए गए हैं। किसी कर्मचारी से सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे तक ही काम कराया जा सकेगा।
इसके अलावा लगातार पांच घंटे काम करने के बाद कम से कम 30 मिनट का अनिवार्य विश्राम देना होगा। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और काम की बेहतर परिस्थितियों को सुनिश्चित करना है।
सेवानिवृत्ति तक मिलेगा राज्य बीमा योजना का लाभ
कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राज्य बीमा योजना के लाभ को लेकर भी बड़ा फैसला किया है। अब कर्मचारियों को बीमा योजना का लाभ उनकी वास्तविक सेवानिवृत्ति की तारीख तक मिलता रहेगा।
पहले कर्मचारियों को यह सुविधा सेवानिवृत्ति वाले वर्ष की 1 अप्रैल तक ही मिलती थी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद कर्मचारी को सेवा के अंतिम दिन तक बीमा सुरक्षा मिल सकेगी।
एक राज्य-एक चुनाव को कैबिनेट की मंजूरी
राजस्थान सरकार ने आगामी पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ कराने का फैसला किया है। कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि दोनों तरह के चुनावों को एक साथ कराने के लिए ‘एक राज्य-एक चुनाव’ व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।
सरकार का तर्क है कि अलग-अलग समय पर पंचायत और नगर निकाय चुनाव होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है। बार-बार चुनाव होने पर प्रशासनिक मशीनरी और सरकारी संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
एक साथ चुनाव से समय और सरकारी खर्च बचाने की कोशिश
सरकार के मुताबिक, पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ कराने से सरकारी धन, कर्मचारियों और समय की बचत होगी। इससे चुनावी प्रक्रिया के दौरान बार-बार प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत भी कम होगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2024-25 के बजट में ही नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने की योजना की घोषणा की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया गया है।
ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया भी होगी शुरू
कैबिनेट ने राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की सिफारिशों को भी मंजूरी दी है। आयोग ने 5 अगस्त 2026 को अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी थीं।
अब नगरीय निकाय और पंचायती राज कानूनों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। पहले से लागू अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के साथ ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था भी आगे बढ़ेगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की तैयारी
राजस्थान सरकार ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण नीति 2026 को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य कृषि और बागवानी क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
नई नीति के तहत फल-सब्जियों, मसालों, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय उत्पादों, लघु वनोपज, शहद, डेयरी और पशु आहार से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा भंडारण गृह, अनाज भंडार और शीत भंडारण जैसी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जाएगा।
किसानों की उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर जोर
सरकार का लक्ष्य कृषि उत्पादों को सीधे बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य हासिल करना है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
नीति के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
निवेश पर मिलेगी पूंजीगत सहायता
नई नीति में अलग-अलग स्तर के ऋण पर पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया गया है। 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत, 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत और 1 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी।
यह सहायता अधिकतम 1.5 करोड़ रुपये तक सीमित रहेगी। किसान उत्पादक संगठनों, जनजातीय क्षेत्र के उद्यमियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजीगत सहायता का प्रावधान भी किया गया है।
बाजरा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
राजस्थान में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए श्री अन्न प्रोत्साहन एजेंसी स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य बाजरा और दूसरे मोटे अनाज के उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार को मजबूत करना होगा।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों को नए बाजार मिलेंगे और राज्य में मोटे अनाज से जुड़े उद्योगों के विकास को भी गति मिलेगी।
खाद्य पार्कों के विकास पर भी जोर
कैबिनेट ने राजस्थान खाद्य पार्क विकास नीति 2026 को भी मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
शीत भंडारण, अनाज भंडारण, निर्यात और कृषि प्रसंस्करण से जुड़े प्रोजेक्ट को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के तहत भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
हर साल लगाए जाएंगे 10 करोड़ पौधे
पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार ने जंगल से बाहर पेड़ लगाने की नीति को भी मंजूरी दी है। यह पहल ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।
सरकार के अनुसार, हर साल 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। नदी किनारे, नालों, सड़कों के किनारे और अन्य उपयुक्त गैर-वन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ पर्यावरण को बेहतर बनाना है।
कैबिनेट के फैसलों से कई क्षेत्रों में बदलाव की उम्मीद
राजस्थान सरकार के इन फैसलों का असर श्रमिकों, सरकारी कर्मचारियों, किसानों, उद्यमियों और स्थानीय निकायों की चुनावी व्यवस्था पर पड़ सकता है। नई वेतन संहिता से श्रमिकों के वेतन और काम के समय को लेकर नियम स्पष्ट होंगे, वहीं एक राज्य-एक चुनाव की व्यवस्था से पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ कराने का रास्ता साफ होगा।
ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी भी तेज होगी। दूसरी ओर कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी नई नीतियों के जरिए सरकार निवेश, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है।

