नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) को साल में एक से अधिक बार आयोजित किए जाने की मांग को संसदीय समर्थन मिला है। संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया है कि परीक्षा वर्ष में दो या तीन बार आयोजित की जाए, ताकि किसी गड़बड़ी या अन्य कारणों से छात्रों का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।
पेपर लीक विवाद पर अधिकारियों से मांगी गई जानकारी
बुधवार को हुई समिति की बैठक में हालिया NEET-UG पेपर लीक विवाद पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अधिकारियों ने कथित पेपर लीक, अब तक की जांच और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
समिति ने ‘NMC अधिनियम, 2019 के तहत NEET परीक्षाओं के संचालन’ विषय पर विचार-विमर्श किया। यह चर्चा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से जुड़े नियामक संस्थानों की कार्यप्रणाली और दक्षता की समीक्षा के तहत की गई।
जवाबदेही तय करने की मांग
सूत्रों के अनुसार, सांसदों ने 2024 और 2026 में सामने आए पेपर लीक विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अब एक बार की घटना नहीं रह गई है, बल्कि बार-बार सामने आने वाली समस्या बन चुकी है। सदस्यों ने सवाल उठाया कि ऐसी घटनाओं के लिए जवाबदेही किसकी होगी और क्या वर्तमान दंडात्मक प्रावधान भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए पर्याप्त हैं।
बैठक में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और NMC के अध्यक्ष अभिजात सी. शेठ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समिति की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने की।
छात्रों को मिले कई अवसर, वर्ष बर्बाद न हो
समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि NEET-UG को साल में कम से कम दो या तीन बार आयोजित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी छात्र का पूरा वर्ष किसी अन्य की गलती या परीक्षा में गड़बड़ी के कारण बर्बाद हो जाता है, तो इसका उसके शैक्षणिक और मानसिक जीवन पर गहरा असर पड़ता है।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया कि इस सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
पहले भी उठ चुकी है मांग
NEET-UG को वर्ष में कई बार कराने की मांग छात्र संगठनों द्वारा लंबे समय से उठाई जाती रही है। जुलाई 2018 में तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की थी कि NTA, JEE Main और NEET-UG दोनों परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करेगा। हालांकि यह योजना कभी लागू नहीं हो सकी।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर भी विचार
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि सरकार अगले परीक्षा चक्र से NEET को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के रूप में आयोजित करने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि सांसदों ने इस बदलाव को चरणबद्ध और सावधानीपूर्वक लागू करने पर जोर दिया।
सदस्यों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को डिजिटल संसाधनों, इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही परीक्षा प्रश्नपत्रों की क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
21 जून को होगी पुनर्निर्धारित परीक्षा
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। अब यह परीक्षा 21 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी। यह हाल के सप्ताहों में तीसरी बार है जब इस मुद्दे पर सरकारी अधिकारियों को संसदीय समितियों के सामने पेश होना पड़ा है।

