नई दिल्ली. राज्यसभा ने सर्जना ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़ी समस्याओं में से एक विलंबित भुगतान को कम करना और भुगतान विवादों के निपटान की प्रक्रिया को आसान और तेज़ बनाना है। सरकार का मानना है कि समय पर भुगतान से छोटे और मध्यम व्यापारियों की नकदी प्रवाह की स्थिति बेहतर होगी और उन्हें व्यापार विस्तार में मदद मिलेगी।
यह Bill Micro, Small and Medium Enterprises Development Act, 2006 में संशोधन करता है। इसमें MSMEs को होने वाले भुगतान, mediation और arbitration से जुड़े मामलों के लिए time-bound व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है।
MSME को Payment Delay से मिलेगी राहत
नए प्रावधानों के तहत हर Central Public Sector Enterprise (CPSE) को MSMEs से goods या services की procurement के बदले जारी invoices का settlement Trade Receivables Discounting System (TReDS) पर करना होगा। इसका उद्देश्य MSME suppliers को payments समय पर दिलाना और उनके working capital से जुड़ी परेशानियों को कम करना है।
छोटे कारोबारियों के लिए delayed payment बड़ी समस्या रही है। कई बार माल या service देने के बाद लंबे समय तक payment अटकने से businesses की रोजमर्रा की जरूरतें, salaries, raw material procurement और expansion plans प्रभावित होते हैं। ऐसे में Bill में payment settlement को ज्यादा structured बनाने की कोशिश की गई है।
Mediation फेल हुई तो 30 दिन में Arbitration
MSME Bill 2026 में dispute resolution को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अगर किसी विवाद में mediation के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो mediation खत्म होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर arbitration के लिए reference करना होगा।
इससे विवादों को लंबे समय तक pending रखने की संभावना कम हो सकती है। सरकार का जोर MSMEs से जुड़े commercial disputes को जल्द निपटाने पर है, ताकि छोटे कारोबारियों की पूंजी लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में फंसी न रहे।
इतना ही नहीं, Bill में arbitration proceedings के लिए भी समयसीमा तय की गई है। इसके तहत pleadings पूरी होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर award जारी किया जाना प्रस्तावित है।
6 महीने से ज्यादा केस लंबित रहा तो 50% रकम का भुगतान
Bill में उन मामलों के लिए भी प्रावधान किया गया है जो लंबे समय तक pending रहते हैं। अगर कोई मामला छह महीने से ज्यादा समय से लंबित है, तो supplier को awarded amount का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान किए जाने का प्रावधान है।
यह व्यवस्था MSME suppliers के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि dispute के कारण लंबे समय तक पैसा अटकने से छोटे कारोबारियों की financial stability प्रभावित होती है।
Jitan Ram Manjhi ने पेश किया Bill
राज्यसभा में दोपहर 2 बजे पहले adjournment के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर Micro, Small and Medium Enterprises Minister Jitan Ram Manjhi ने Bill पेश किया।
Bill पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए Jitan Ram Manjhi ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में MSME sector को मिलने वाले credit में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि 2014-15 में MSME sector को दिया गया outstanding credit लगभग 10 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
मंत्री के अनुसार, यह आंकड़ा MSME sector में लगातार बढ़ते credit flow को दर्शाता है। सरकार का लक्ष्य छोटे और मध्यम कारोबारों को मजबूत बनाना, उनकी growth potential बढ़ाना और business expansion को बढ़ावा देना है।
MSME Credit Guarantee में भी बड़ा इजाफा
Jitan Ram Manjhi ने Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 से 2022 के बीच MSMEs को दी गई कुल credit guarantee करीब 3.14 लाख करोड़ रुपये थी।
वहीं 2022-23 से 2025-26 के सिर्फ चार वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 10.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। सरकार के मुताबिक, इससे MSMEs के लिए formal credit तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का पता चलता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार MSME sector को मजबूत करने, उसकी growth को गति देने और कारोबारियों के लिए expansion के नए अवसर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विपक्ष ने MSME को Economy की रीढ़ बताया
Bill पर चर्चा के दौरान TMC की Dola Sen ने MSME sector को देश की economy की backbone बताया। उन्होंने कहा कि manufacturing sector देश की GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है और MSMEs employment generation में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने सरकार पर MSME sector की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया।
BJD के Santrupt Misra ने भी MSMEs की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि sector GDP में बड़ा योगदान देता है और करोड़ों लोगों को employment प्रदान करता है। उन्होंने दावा किया कि MSME sector की करीब 8 से 10 लाख करोड़ रुपये की राशि pipeline में अटकी हुई है।
उन्होंने सरकार से केवल cosmetic changes के बजाय concrete reforms लागू करने की मांग की, ताकि MSMEs को वास्तविक राहत मिल सके।
BJP ने Bill को बताया छोटे कारोबारियों के हित में कदम
चर्चा में BJP की Sumitra Balmik ने कहा कि सरकार का focus समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने तथा उन्हें देश की growth story से जोड़ने पर है। उन्होंने कहा कि MSME Bill का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को support देना और उन्हें economic development में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर देना है।
चर्चा में YSRCP के Golla Baburao, AIADMK के M Thambidurai, NCP के Rajendra Jain, TDP के Masthan Rao Yadav Beedha, BRS के Ravi Chandra Vaddiraju, UPPL के Pramod Boro और BSP के Ramji समेत अन्य सांसदों ने भी अपने विचार रखे।
MSME Sector के लिए क्यों अहम है Bill?
MSME businesses के लिए timely payment केवल एक administrative issue नहीं है, बल्कि यह उनकी पूरी financial health से जुड़ा हुआ है। जब payment लंबे समय तक अटकता है तो working capital की कमी, कर्मचारियों के वेतन, raw material खरीद और नए orders पूरे करने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
ऐसे में TReDS-based invoice settlement, 30-day arbitration reference, 90-day award timeline और छह महीने से ज्यादा pending मामलों में 50 प्रतिशत payment जैसे प्रावधान छोटे कारोबारियों के cash flow को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
सरकार की कोशिश है कि MSME sector को सिर्फ credit availability के जरिए नहीं, बल्कि faster payment और efficient dispute resolution mechanism के जरिए भी मजबूत किया जाए।
Bill पारित होने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की अगली बैठक अब सुबह 11 बजे होगी।

