नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच देश की तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी कर दी। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के ‘Speed’, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के ‘Power’ और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) के ‘XP95’ पेट्रोल के दाम 2.09 रुपये से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए गए हैं। हालांकि, आम पेट्रोल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें डीरেগुलेटेड हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी सामान्य पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं और केवल प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में दो रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है।
LPG को लेकर घबराहट कम, 7,500 उपभोक्ताओं ने अपनाया PNG
सुजाता शर्मा ने यह भी बताया कि LPG को लेकर पैनिक बुकिंग में अब काफी कमी आई है। उनके मुताबिक करीब 7,500 उपभोक्ता LPG से PNG पर शिफ्ट हुए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण स्थिति चिंताजनक जरूर बनी हुई है, लेकिन किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के यहां ड्राई आउट की स्थिति सामने नहीं आई है।
उन्होंने बताया कि LPG सिलेंडर की डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के जरिए की जा रही है। पिछले दिन करीब 55 लाख रिफिल बुकिंग रिक्वेस्ट मिलीं, लेकिन सप्लाई और डिलीवरी सामान्य बनी हुई है। इसके अलावा 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कमर्शियल LPG के लिए अलोकेशन ऑर्डर जारी किए हैं। पिछले एक सप्ताह में करीब 11,300 टन कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को दी गई है और सभी राज्यों में पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध है।
इंडस्ट्रियल डीजल पर भी महंगाई की मार
प्रीमियम पेट्रोल के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डीजल भी महंगा हो गया है। इसकी कीमत में 22.02 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र और परिवहन लागत पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर सबसे बड़ा दबाव
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया है। इस युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई पर बड़ा असर डाला है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। आमतौर पर दुनिया की कुल तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
आमतौर पर इस समुद्री मार्ग से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और तेल उत्पाद ट्रांजिट होते हैं। सप्लाई प्रभावित होने से बाजार में दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसका असर डीजल, जेट फ्यूल और LPG जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों पर भी तेजी के रूप में दिख रहा है।
IEA ने दिए राहत के सुझाव
इस बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल बाजार में आई इस उथल-पुथल का असर कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। एजेंसी ने कहा है कि हाईवे पर स्पीड लिमिट में कम से कम 10 किमी प्रति घंटा की कटौती की जाए, जहां संभव हो वहां इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाई जाए, हवाई यात्रा से बचा जाए और कार शेयरिंग को बढ़ावा दिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल आम पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं को राहत जरूर है, लेकिन प्रीमियम फ्यूल और इंडस्ट्रियल ईंधन के महंगे होने से बाजार में महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई है।
