नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खेतों में अपने हाथों से काम करने वाली महिलाओं को औपचारिक रूप से किसान के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को केवल जमीन के मालिकाना हक के आधार पर नहीं, बल्कि उनके काम और मेहनत के आधार पर भी पहचाना जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश के सांची में महिला किसान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि महिलाएं फसल उगाने, पशुपालन, दूध उत्पादन और मवेशियों की देखभाल जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उनके योगदान को अक्सर पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती।
उन्होंने कहा कि खेतों में मेहनत करने वाली महिलाएं भी किसान हैं और उन्हें औपचारिक पहचान दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को उचित मंचों पर उठाएंगे, ताकि महिला किसानों को उनके काम के लिए सम्मान और मान्यता मिल सके।
महिलाओं की कृषि क्षेत्र में अहम भूमिका
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि का दायरा केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। बागवानी, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और पशुपालन भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इन सभी क्षेत्रों में महिलाएं योगदान देती हैं, इसलिए उनकी भूमिका को पहचानना जरूरी है।
उन्होंने महिला किसानों से खेती के साथ-साथ उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण और ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्योग शुरू करके महिलाएं अपनी आय बढ़ा सकती हैं।
हर गांव के परिवार को आजीविका से जोड़ने की योजना
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रायसेन और विदिशा जिलों में एक पायलट पहल शुरू की जाएगी। इसके तहत हर गांव के प्रत्येक परिवार को आजीविका के कम से कम एक साधन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि गांवों को गरीबी से मुक्त बनाने की दिशा में काम किया जा सके।
इस पहल में खेती, कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, पशुपालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन और छोटे व्यवसायों के माध्यम से टिकाऊ आय के अवसर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
चौहान ने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए परिवारों को रोजगार और आमदनी के साधनों से जोड़ना जरूरी है। केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय ऐसे अवसर तैयार किए जाने चाहिए, जिनसे परिवार लंबे समय तक अपनी आजीविका चला सकें।
दाल मिल और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाने पर जोर
महिला किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए चौहान ने कृषि आधारित छोटे उद्योग स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में दालों का उत्पादन अधिक होता है, वहां दाल मिलें लगाई जा सकती हैं। इसके अलावा तेल प्रसंस्करण इकाइयां और टमाटर केचप जैसे उत्पाद बनाने वाली इकाइयां भी शुरू की जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऐसे उद्यम स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण, मशीनरी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। कृषि उत्पादों को सीधे बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण करने से उनकी कीमत बढ़ सकती है और किसानों की कमाई में इजाफा हो सकता है।
महिला किसानों को आसान ऋण और तकनीकी सहायता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने महिला किसानों की वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कम या बिना किसी संपार्श्विक गारंटी के ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
इसके साथ ही महिला नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देने, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और कृषि योजनाओं व सरकारी खरीद के अवसरों तक महिलाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
ग्रामीण सड़कों और आवास योजनाओं का भी किया जिक्र
अपने दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 46 सड़कों का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही उन्होंने सड़क निर्माण में गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, वर्ष 2025-26 में सांची विधानसभा क्षेत्र में 3,081 और वर्ष 2024-25 में 5,035 मकान स्वीकृत किए गए।
इसके अतिरिक्त, पीएम जनमन योजना के तहत 218 और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 246 मकान स्वीकृत किए गए। चौहान ने बताया कि हालिया सर्वेक्षण में विधानसभा क्षेत्र में 22,477 अतिरिक्त मकानों की जरूरत सामने आई है। उन्होंने कहा कि कच्चे मकानों में रहने वाले पात्र परिवारों को सहायता दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

