नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के कालीआबोर में करीब ₹6,950 करोड़ की लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का भूमि पूजन किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि काजीरंगा केवल एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं, बल्कि असम की आत्मा और भारत की जैव-विविधता का अनमोल रत्न है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं और भारत यह दिखा रहा है कि दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
30 किमी सड़क चौड़ीकरण भी शामिल है
करीब 86 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के कालीआबोर–नुमालीगढ़ खंड का फोरलेनिंग और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरने वाला 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है। इस एलिवेटेड मार्ग को इस तरह डिजाइन किया गया है कि गैंडे, हाथी और बाघ जैसे वन्यजीव नीचे से सुरक्षित रूप से गुजर सकें। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और यातायात निर्बाध रहेगा। परियोजना में 21 किमी बाइपास और 30 किमी सड़क चौड़ीकरण भी शामिल है, जो नगांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी।
प्रधानमंत्री ने काजीरंगा की अपनी पिछली यात्रा को याद करते हुए कहा कि हाथी सफारी सहित वहां बिताया समय उनके जीवन के सबसे खास अनुभवों में से एक रहा। उन्होंने असम को वीरता, संस्कृति और प्रतिभा की भूमि बताते हुए हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित बागुरुम्बा ध्वौ उत्सव में 10,000 से अधिक बोडो कलाकारों की रिकॉर्ड प्रस्तुति की भी सराहना की।
उन्होंने असम में विकास कार्यों का जिक्र करते हुए लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तारित टर्मिनल और नामरूप में अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स की आधारशिला का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पहल सरकार के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प को दर्शाती हैं।
आजीविका के नए अवसर पैदा हुए
काजीरंगा में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए होमस्टे, गाइड सेवा, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के जरिए आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने एंटी-पोचिंग प्रयासों की सफलता का भी उल्लेख किया और कहा कि 2025 में गैंडे के शिकार की कोई घटना दर्ज नहीं हुई, जो बेहतर सुरक्षा, आधुनिक निगरानी और ‘वन दुर्गा’ जैसी पहलों के कारण संभव हुआ।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी (कामाख्या)–रोहतक और डिब्रूगढ़–लखनऊ (गोमती नगर) के बीच चलने वाली दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई और गुवाहाटी–कोलकाता वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे व्यापारियों, छात्रों और यात्रियों को लाभ होगा और पूर्वोत्तर देश के बाकी हिस्सों से और मजबूती से जुड़ेगा।
कार्यक्रम में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पबित्रा मरघेरिटा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
