नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग, निवेश, नवाचार और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक भरोसे का किया जिक्र
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक तरफ भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और दूसरी ओर दुनिया का भारत पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का हर नागरिक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ काम कर रहा है। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की तेजी से बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि देश का semiconductor ecosystem लगातार विस्तार कर रहा है, जिससे innovation, investment और growth के नए अवसर बन रहे हैं।
भारत को Semiconductor Industry का पसंदीदा ठिकाना बनाने की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए खुद को एक पसंदीदा destination बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है। उनके मुताबिक, दुनिया भरोसेमंद और नए manufacturing destinations की तलाश में है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने के लिए अपनी क्षमता विकसित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित semiconductor chips अब देश के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी उपलब्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में मोहाली और सूरत में दो सेमीकंडक्टर संयंत्रों में commercial production शुरू हुआ है। उन्होंने इसे भारत की semiconductor journey में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
Semiconductor Mission 2.0 का बढ़ा बजट
प्रधानमंत्री ने India Semiconductor Mission 2.0 का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसके लिए आवंटन को पहले चरण के 8 अरब डॉलर से बढ़ाकर 13.5 अरब डॉलर किया गया है। सरकार की ओर से अब तक 12 chip-making projects को मंजूरी दी जा चुकी है और अगले चरण में इन परियोजनाओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत का जोर केवल manufacturing तक सीमित नहीं है, बल्कि design, research, packaging, materials और पूरी supply chain को मजबूत करने पर भी है।
Ashwini Vaishnaw ने बताया Semicon 2.0 का फोकस
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत कई दशकों से semiconductor industry स्थापित करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब इस दिशा में आधार तैयार हो चुका है और अगला लक्ष्य Semicon 2.0 के माध्यम से पूरे उद्योग को विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि Semicon 2.0 में semiconductor design, machines and materials, memory, silicon, compound और logic fabrication तथा research and development जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।
सरकार ने भारत में अलग-अलग जरूरतों के लिए chips design करने वाली कम से कम 200 startups और companies को सहयोग देने का लक्ष्य भी रखा है।
600 से ज्यादा Exhibitors और 50 से अधिक देशों की भागीदारी
SEMICON India 2026 में भारत और दुनिया की semiconductor तथा electronics industry से जुड़े बड़े कारोबारी समूह, निवेशक, researchers, policymakers, startups, academic institutions और students हिस्सा ले रहे हैं। PIB के मुताबिक, इस आयोजन में 600 से अधिक exhibitors और 300 international companies शामिल हो रही हैं। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 52 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी है।
कार्यक्रम में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह country pavilions बनाए गए हैं। इसके अलावा 12 State Government pavilions और एक dedicated Startup Pavilion भी मौजूद है।
‘Silicon to Systems’ पर भारत का फोकस
SEMICON India 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को संपूर्ण मूल्य श्रृंखला से जोड़ना है। इसमें सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिजाइन, एडवांस्ड पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक के क्षेत्र को एक साथ दर्शाया जा रहा है।
कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, नवाचार, निवेश और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल-यूनिट के साथ साझेदारी को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में हाल में आयोजित BRICS Summit का भी उल्लेख किया और कहा कि नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में सभी सदस्य देशों की सहमति से New Delhi Declaration को अपनाया गया। उन्होंने इसे भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय भरोसे का एक और उदाहरण बताया।

