नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी द्वारा सभी राजनीतिक दलों को लिखे गए पत्र के बाद महिला आरक्षण को लेकर राजनीति तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए समर्थन मांगा है, जिस पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है मामला?
महिला आरक्षण बिल, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, 2023 में संसद से पारित हुआ था। इस कानून के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। अब प्रस्तावित संशोधन के जरिए इसे 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर लागू कर 2029 चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में कहा कि यह “लोकतंत्र को मजबूत करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का ऐतिहासिक अवसर” है। उन्होंने सभी सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस संशोधन का समर्थन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि 2023 में सभी दलों ने मिलकर इस बिल को पास किया था और अब समय आ गया है कि इसे पूरी तरह लागू किया जाए।
खड़गे का पलटवार
खड़गे ने सरकार पर बिना पूरी जानकारी दिए विपक्ष से समर्थन मांगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन (Delimitation) और अन्य अहम पहलुओं की जानकारी दिए बिना सार्थक चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चुनाव के दौरान विशेष सत्र बुलाकर “राजनीतिक फायदा उठाने” की कोशिश कर रही है, न कि महिलाओं को सशक्त बनाने की।
ऑल पार्टी मीटिंग की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि 29 अप्रैल 2026 के बाद सभी दलों की बैठक बुलाई जाए, ताकि परिसीमन और संविधान संशोधन जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके।
राजनीतिक माहौल गर्म
महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर केंद्र और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। आने वाले विशेष सत्र में इस मुद्दे पर जोरदार बहस होने की संभावना है।
