नई दिल्ली. भारत के Power Sector पर एक बार फिर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। कमजोर मानसून और El Niño के मजबूत होने के कारण कई इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही है। इसका सीधा असर नदियों और जलाशयों में पानी के स्तर पर पड़ा है। पानी की कमी के कारण देश के Hydropower Projects से बिजली उत्पादन घटा है और इससे पहले से दबाव झेल रहे Power Grid पर भी असर पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के अंत तक देश में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से बिजली उत्पादन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 12 फीसदी कम रहा। ऐसे में लगातार चौथे महीने Hydro Power Generation में गिरावट की स्थिति बनने की आशंका है।
अगस्त में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश
कमजोर बारिश बिजली उत्पादन के लिए बड़ी चिंता बन गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने देश में बारिश लंबे समय के औसत से 16 फीसदी से ज्यादा कम रही। El Niño की स्थिति मजबूत होने से मौसम पर असर पड़ा और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनी रहीं।
बारिश की कमी का असर Reservoirs और Rivers में पानी की उपलब्धता पर पड़ा। चूंकि हाइड्रो पावर प्लांट पानी के प्रवाह पर निर्भर करते हैं, इसलिए जलस्तर कम होने पर बिजली उत्पादन भी प्रभावित होता है।
बिजली की मांग अभी भी बनी हुई है ज्यादा
एक तरफ Hydro Power Generation में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ देश में बिजली की मांग लगातार बनी हुई है। कमजोर मानसून के कारण कई क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहा। इसके अलावा किसानों को सिंचाई के लिए बिजली पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा।
इस वजह से Power Demand पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। खासकर शाम के समय स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है। दिन में Solar Power से अच्छी मात्रा में बिजली मिलती है, लेकिन शाम होते ही सौर ऊर्जा का उत्पादन तेजी से कम हो जाता है। इसी समय बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है।
कोयले से चलने वाले पावर प्लांट पर भी बढ़ा दबाव
हाइड्रो पावर उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार को इस साल की शुरुआत में एक बड़े Coal-fired Power Plant को मानसून के दौरान भी चालू रखने के लिए Emergency Measures को आगे बढ़ाना पड़ा था।
इसका मकसद Hydro Power की कमी के कारण पैदा होने वाले अंतर को Thermal Power के जरिए पूरा करना था। इससे पता चलता है कि कम जल उपलब्धता का असर केवल हाइड्रो प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे Power Supply System पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
जून में 21 फीसदी तक गिरा था हाइड्रो उत्पादन
इस साल मानसून की शुरुआत भी बिजली क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण रही। जून में देश में पिछले करीब 12 वर्षों में सबसे कम बारिश वाले जून में से एक दर्ज होने के कारण Hydro Power Generation में लगभग 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
यह फरवरी 2024 के बाद हाइड्रो बिजली उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट बताई गई। जुलाई में बारिश की स्थिति में कुछ सुधार हुआ, लेकिन अगस्त में एक बार फिर मानसून कमजोर पड़ने से Hydro Power Generation पर दबाव बढ़ गया।
आगे क्या हो सकती है चुनौती?
भारत की Power Demand लगातार बढ़ रही है और ऐसे में Hydro Power Generation में गिरावट बिजली व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। Reservoir Levels में कमी, कमजोर मानसून और शाम के समय Solar Power Output घटने जैसे कारक आने वाले दिनों में Power Supply Management को मुश्किल बना सकते हैं।
हालांकि देश के पास Thermal, Solar, Wind और Hydro जैसे कई Power Sources हैं, लेकिन किसी एक स्रोत में बड़ी गिरावट का असर पूरे Power Grid पर पड़ सकता है। ऐसे में मानसून की स्थिति, जलाशयों में पानी का स्तर और बिजली की मांग आने वाले समय में खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेंगे।

