राष्ट्रपिता के पोते गोपालकृष्ण गांधी बन सकते हैं विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार

विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए महात्मा गांधी के पोते व पूर्व राजनैयिक गोपालकृष्ण गांधी का नाम सामने आ रहा है. 71 वर्षीय गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर कांग्रेस, वामदलों और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमों ममता बनर्जी को राजी कर सकती है. गोपालकृष्ण गोखले ममता बनर्जी की भी पसंदीदा उम्मीदवार हैं. ममता ने साल 2012 में उपराष्ट्रपति पद के लिए गोपालकृष्ण गांधी का नाम प्रस्तावित किया था. हालांकि गांधी इसके लिए राजी नहींं हुए थे.

गोपाल कृष्ण गांधी
फोटो साभार- फेसबुक

अंग्रेजी दैनिक अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी रिपोर्ट में गोपालकृष्ण गांधी ने कहा “बातचीत बेहद शुरुआती दौर में हुई थी, और मुद्दे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी. उन्होनें कहा कि फिलहाल इससे अधिक कहना उनके लिए सही नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी गोपाल कृष्ण गोखले से मिल चुके हैं.

वेब न्यूज चैनल ‘फर्स्टपोस्ट’ के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जेडीयू नेता शरद यादव, सीपीआइ के महासचिव एस. सुधााकर रेड्डी और डी. राजा भी गोपाल कृष्ण गोखले से इस संदर्भ में मिलकर बातचीत की है.

राष्ट्रपति चुनाव की तारीख 17 जुलाई को घोषित की गई है. नामांंकन की अंतिम तारीख 28 जून तक है. लेकिन अबतक पक्ष या विपक्ष ने अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. 24 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी विदेश दौरे पर जाने वाले हैं. उनके जाने से पहले; एनडीए अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है. कयास लगाये जा रहे हैं कि इसी आधार पर विपक्ष अपने उम्मीदवार तय करेगी. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और जेडीयू नेता शरद यादव भी विपक्ष के उम्मीदवार बनाये जा सकते हैं.

एनडीए को राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए 20,000 वोट की जरूरत है. बीजेपी सर्वसम्मति से कोई नाम प्रस्तावित करना चाहती है. इस संबंध में बीजेपी नेता राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडु, सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से शुक्रवार को मिलने वाले हैं.

गोपालकृष्ण गांधी श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त रह चुके हैं. साल 1968-92 के बीच वे अाइएएस अधिकारी रहे. गोपालकृष्ण गांधी विभिन्न प्रशासनिक और कूटनीतिक सेवाओं में रहे हैं. इस दौरान वे राष्ट्रपति के सहसचिव पद को भी संभाला. वे साल 2004-2009 के बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। उन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय के स्टीफंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एमए किया है.