नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) में सात राज्यसभा सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मिलने का समय मांगा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, भगवंत मान पंजाब के सभी विधायकों के साथ दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और उन सांसदों के खिलाफ “राइट टू रिकॉल” लागू करने की मांग रखेंगे, जिन्होंने पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का रुख किया है।
राज्यसभा में अयोग्यता की तैयारी
AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने कहा कि पार्टी जल्द ही उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan को पत्र लिखेगी। इसमें सातों बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी।
संजय सिंह ने कहा,
“दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन या गुट को कानूनी मान्यता नहीं है, भले ही वह दो-तिहाई बहुमत ही क्यों न हो।”
क्या कहता है कानून?
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के अनुसार, यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ता है या व्हिप के खिलाफ जाता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।
हालांकि, राज्यसभा और लोकसभा में “स्प्लिट” (Split) या अलग गुट बनाने को मान्यता नहीं दी जाती, जिससे AAP अपने दावे को मजबूत बता रही है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद 24 अप्रैल को तब शुरू हुआ जब Raghav Chadha समेत सात राज्यसभा सांसदों ने AAP से इस्तीफा देकर BJP में शामिल होने का ऐलान किया।
बताया जा रहा है कि चड्ढा के साथ Ashok Mittal और Sandeep Pathak भी भाजपा में शामिल हो गए हैं।
वहीं, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के भी इस गुट को समर्थन देने की बात सामने आई है।
चुनाव से पहले बड़ा झटका
यह घटनाक्रम 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि बागी सांसदों में से ज्यादातर पंजाब से ही जुड़े हैं।
आगे क्या?
AAP “राइट टू रिकॉल” को लेकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई तेज करेगी
राज्यसभा में अयोग्यता का मुद्दा गरमाएगा
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अगले कदम तय होंगे
