नई दिल्ली. अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए अपने महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। ट्रस्ट ने उनकी जगह बजरंग बागड़ा को नया महासचिव नियुक्त किया है। यह फैसला राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी और दान राशि चोरी मामले की जांच के बीच लिया गया है।
दान राशि विवाद के बाद दिया था इस्तीफा
चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने उस समय अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया था, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराई। जांच की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों ने अपने पद छोड़ने का फैसला किया था।
जांच में सामने आई करोड़ों रुपये की गड़बड़ी
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों ने कथित तौर पर बड़ी रकम गायब कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद उनकी फुटेज की नियमित निगरानी नहीं की जा रही थी, जिसका फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये की रकम गायब होने की आशंका है।
चंपत राय के ड्राइवर पर भी कार्रवाई
इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में चंपत राय का ड्राइवर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव भी शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक चंपत राय ने अपने करीबी लोगों से कहा है कि टिन्नू यादव ने उनके विश्वास का गलत फायदा उठाया और पूरे मामले में वही मुख्य भूमिका निभा रहा था।
ट्रस्ट की बैठक में लिया गया अहम फैसला
सोमवार को राम जन्मभूमि परिसर में ट्रस्ट की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सात स्थायी सदस्य शामिल हुए। सुरक्षा कारणों से बैठक का स्थान बदला गया था और मंदिर परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। चंपत राय और अनिल मिश्रा इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
बैठक के बाद ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करते हुए बजरंग बागड़ा को नया महासचिव बनाने का फैसला लिया।
ट्रस्ट अध्यक्ष बोले- दोषियों को मिले कड़ी सजा
ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि रामलला के चढ़ावे में कथित चोरी की घटना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि जांच पूरी निष्पक्षता से होगी और दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे। साथ ही उन्होंने अपील की कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले का राजनीतिक लाभ नहीं उठाया जाना चाहिए।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच सत्ता संघर्ष चल रहा है, जिसका असर राम मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़ रहा है।
कांग्रेस ने मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर और हिंदुत्व के नाम पर लोगों की भावनाओं के साथ विश्वासघात किया गया है।
जांच अभी जारी
विशेष जांच दल इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच एजेंसियों ने कुछ डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिनमें कथित तौर पर आरोपी मंदिर परिसर से नकदी छिपाकर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि अभी तक चंपत राय, अनिल मिश्रा या अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। दूसरी ओर, फैजाबाद बार एसोसिएशन के कुछ वकीलों ने पुलिस को शिकायत देकर उनके खिलाफ भी मामला दर्ज करने की मांग की है।
फिलहाल ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन के साथ जांच जारी है और सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

