नई दिल्ली. दुनियाभर में आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। खाद की महंगाई, डीजल की बढ़ती लागत और खेती से जुड़े खर्चों में इजाफे के बीच El Niño का संभावित खतरा वैश्विक खाद्य बाजार पर दबाव बढ़ा सकता है। S&P Global की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन परिस्थितियों का असर आने वाले महीनों में दिखना शुरू हो सकता है, जबकि खाद्य कीमतों पर इसका बड़ा प्रभाव 2027 में सामने आने की आशंका है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर El Niño का प्रभाव असाधारण रूप से मजबूत रहा, तो दुनिया के प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे अनाज और दूसरी कृषि उपज की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं, खाद और डीजल की कमी या महंगाई किसानों की उत्पादन लागत बढ़ाकर उनकी कमाई पर भी दबाव डाल रही है।
खाद और डीजल की महंगाई से बढ़ेगा खेती का खर्च
खेती में खाद, बीज, डीजल और सिंचाई जैसे संसाधनों की अहम भूमिका होती है। खाद के उत्पादन में प्राकृतिक गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जबकि डीजल का उपयोग खेतों में मशीनें चलाने, सिंचाई और फसल को बाजार तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। ऐसे में ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से कृषि उत्पादन महंगा हो जाता है।
S&P Global की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों ने डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। दूसरी ओर, जैव ईंधन (Biofuels) की मांग बढ़ने से कृषि उपज के इस्तेमाल को लेकर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। कुछ क्षेत्रों में किसान खाद्य उत्पादन के बजाय ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाली फसलों को प्राथमिकता दे सकते हैं, खासकर तब जब उनसे बेहतर कमाई की संभावना हो।
हालांकि, रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि खाद का उत्पादन धीरे-धीरे सुधर सकता है। फसलों की कीमतें बढ़ने से किसानों की आय में सुधार हो सकता है। इससे वे अधिक जमीन पर खेती करने और खाद का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। लेकिन इन बदलावों का असर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति के रूप में दिखाई देने में समय लग सकता है। इस बीच उपभोक्ताओं को महंगे खाद्य पदार्थों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है El Niño और इससे खेती को कैसे खतरा है?
El Niño प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में सामान्य से अधिक बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान और मौसम के सामान्य पैटर्न पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में 2026 के आखिर में El Niño के बेहद मजबूत होने की आशंका को 2027 की कृषि उपज के लिए एक प्रमुख जोखिम बताया गया है। यदि इसका प्रभाव अधिक तीव्र रहा, तो एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई कृषि उत्पादक क्षेत्रों में गंभीर सूखा या बाढ़ जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
ऐसे मौसम में फसलों की पैदावार घटने और कृषि आपूर्ति बाधित होने का खतरा रहता है। जिन इलाकों में पहले से ही खाद का इस्तेमाल कम होने के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, वहां स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
El Niño का असर केवल गेहूं, चावल और दूसरी प्रमुख खाद्यान्न फसलों तक सीमित नहीं रह सकता। कॉफी, कोको और अन्य नकदी फसलों का उत्पादन भी मौसम में बदलाव से प्रभावित हो सकता है। इन फसलों पर निर्भर गरीब और कमजोर कृषि समुदायों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
दुनिया के पास अनाज का सीमित भंडार, बढ़ सकती है कीमतों में उथल-पुथल
रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक अनाज भंडार ऐतिहासिक रूप से कम स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में अगर एक साथ कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में फसल खराब होती है, तो उपलब्ध भंडार से आपूर्ति की कमी को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
अनाज के भंडार सीमित होने की स्थिति में उत्पादन में गिरावट का असर बाजार की कीमतों पर अधिक तेजी से पड़ सकता है। यदि इसके साथ खाद, डीजल और अन्य कृषि संसाधनों की लागत भी ऊंची बनी रहती है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों की खरीदने की क्षमता और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।
खाद्य संकट का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
वैश्विक खाद्य कीमतों पर दबाव किसी एक वजह से नहीं बढ़ रहा है। भू-राजनीतिक संघर्ष, ऊर्जा की महंगाई, खाद की आपूर्ति में बाधाएं, जैव ईंधन की बढ़ती मांग और मौसम की अनिश्चितता एक साथ असर डाल रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर बाजार में अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है, लेकिन कृषि उत्पादन की लागत बढ़ने का असर खाद्य कीमतों तक पहुंचने में अधिक समय लगता है। इसकी वजह यह है कि किसान फसल की बुवाई और कटाई से कई महीने पहले ही बीज, खाद और ईंधन खरीदते हैं। इस कारण लागत में बढ़ोतरी का पूरा असर बाद में सामने आ सकता है।
S&P Global के मुताबिक, दुनिया में खाद्य संकट आना तय नहीं है, लेकिन इस खतरे को अब दूर की आशंका मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2027 में खाद्य कीमतों पर कितना दबाव पड़ेगा, यह El Niño की तीव्रता, खाद की आपूर्ति में सुधार, किसानों की उत्पादन क्षमता और वैश्विक अनाज बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

