नई अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी और गबन के मामले में जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की Special Investigation Team यानी SIT ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और दो दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने हुई।
सुप्रीम कोर्ट को SIT ने क्या बताया?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया कि SIT ने मामले की जांच से जुड़ी प्रगति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी है। अदालत ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन भी किया।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। ऐसे में अगर निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपियों को default bail का कानूनी लाभ मिल सकता है। इसी वजह से सरकार ने अदालत को बताया कि चार्जशीट दो दिनों के भीतर दाखिल कर दी जाएगी।
जांच में क्या-क्या जुटाया गया?
SIT की जांच में मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेजों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की गई है। इससे पहले जांच के दौरान CCTV फुटेज और अन्य रिकॉर्ड को भी खंगाला गया था।
मामले में जांच एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर रहा है कि दान में प्राप्त नकद राशि और अन्य कीमती वस्तुओं से जुड़ी प्रक्रिया में कथित अनियमितता कैसे हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
चंदे की गिनती और रिकॉर्ड को लेकर भी उठे सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से दान में मिलने वाली राशि और अन्य वस्तुओं की गिनती तथा रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी मामले में चर्चा का विषय रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कीमती वस्तुओं से संबंधित रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं और उन्हें बैंक लॉकर में रखने की व्यवस्था है।
दान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की जांच के दौरान दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा गया है।
आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा था मामला
कथित दान चोरी मामले की जांच के दौरान अयोध्या पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें छह counting agents, ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय के ड्राइवर और दान गिनती से जुड़े एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी का नाम सामने आया था।
मामला सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासन और दान प्रबंधन को लेकर भी बदलाव किए गए। ट्रस्ट ने दान की गिनती को ज्यादा तकनीक आधारित और व्यवस्थित बनाने के विकल्पों पर भी चर्चा की है।
ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव भी हुए
दान संबंधी विवाद के बीच ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किए। सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक Chief Executive Officer नियुक्त किया गया। इसके अलावा तीन नए ट्रस्टी भी बनाए गए, जिनमें डॉ. निर्मला यादव, अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और महेश भगचंदका शामिल हैं।
ट्रस्ट की ओर से इन बदलावों को प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने से जोड़ा गया है। सीईओ पद के लिए कुल 5,585 आवेदन आने के बाद चयन समिति ने तीन नामों का पैनल तैयार किया था।
25 सितंबर की समयसीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
SIT की ओर से चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा इस मामले में कानूनी रूप से भी अहम है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिनों की अवधि 25 सितंबर को पूरी होगी। इसके बाद यदि चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है, तो आरोपियों को default bail का अधिकार मिल सकता है।
इसी वजह से जांच एजेंसी अब तेजी से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल SIT की स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया है।
सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र जांच की मांग भी पहुंची
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं, जिनमें स्वतंत्र जांच और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की व्यापक जांच की मांग की गई है। जुलाई में अदालत ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किए थे।
अदालत ने जांच की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रक्रिया पर भी नजर बनाए रखी है। ट्रस्ट ने पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जांच का दायरा और प्रक्रिया स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
अब चार्जशीट से सामने आएगी जांच की तस्वीर
SIT के दो दिनों में चार्जशीट दाखिल करने की जानकारी के बाद अब मामले में अगला बड़ा घटनाक्रम अभियोजन दस्तावेज के सामने आने का होगा। चार्जशीट में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, आरोपों, साक्ष्यों और आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण शामिल होगा।
फिलहाल मामले में आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण नहीं हुआ है। आगे की कार्रवाई चार्जशीट और अदालत के समक्ष होने वाली सुनवाई के आधार पर आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया पर अब 25 सितंबर की समयसीमा तक विशेष नजर रहेगी।
