नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को जारी पूर्वानुमान में कहा कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में सामान्य तारीख से पहले 26 मई को पहुंच सकता है। आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल में दस्तक देता है और इसके बाद धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ता है।
4 दिन आगे-पीछे हो सकती है मानसून की एंट्री
India Meteorological Department (IMD) के मुताबिक इस बार मानसून 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है, हालांकि इसमें ±4 दिन की त्रुटि सीमा हो सकती है। यानी मानसून 4 दिन पहले या 4 दिन बाद भी पहुंच सकता है। पिछले साल दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दी थी।
अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में अनुकूल परिस्थितियां
IMD ने कहा कि अगले 24 घंटों में दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार केरल में मानसून का आगमन भारतीय मुख्य भूमि पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
गर्मी से मिलेगी राहत
IMD ने कहा कि जैसे-जैसे मानसून उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा, वैसे-वैसे देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी से राहत मिलने लगेगी।
दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है और यह देश में सालभर होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा लेकर आता है।
कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम
मानसून भारत की कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अच्छी बारिश से फसलों, जलाशयों और भूजल स्तर को बड़ा फायदा मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मानसून पहुंचने से खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी और किसानों को राहत मिल सकती है।
इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान
हालांकि IMD ने यह भी कहा है कि इस साल देश में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार 2026 के मानसून सीजन में भारत में लगभग 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर सामान्य औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।
एल नीनो का असर पड़ सकता है भारी
IMD के मुताबिक प्रशांत महासागर में एल नीनो (El Niño) की स्थिति विकसित हो रही है, जिसकी वजह से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है।
मौसम विभाग ने 1 मई को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा था कि ENSO-न्यूट्रल परिस्थितियां धीरे-धीरे एल नीनो की ओर बढ़ रही हैं। एल नीनो की स्थिति बनने पर आमतौर पर भारत में बारिश कम होती है और सूखे जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
