नई दिल्ली. भारत में चीनी उद्योग (Sugar Industry) ने 2025–26 सीजन में उत्पादन बढ़ने के बावजूद सरकार से Minimum Selling Price (MSP) बढ़ाने की मांग फिर दोहराई है। बढ़ती लागत, कमजोर बाजार कीमत और किसानों के बकाया भुगतान (Cane Arrears) ने मिलों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है।
चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी, लेकिन चिंता बरकरार
Indian Sugar and Bioenergy Manufacturers Association द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 अप्रैल 2026 तक देश का कुल चीनी उत्पादन 275.28 लाख टन रहा, जो पिछले साल के 256.49 लाख टन के मुकाबले करीब 7% ज्यादा है।
हालांकि, उत्पादन बढ़ने के बावजूद मिलों की संख्या में गिरावट देखी गई है। इस समय सिर्फ 5 चीनी मिलें (Sugar Mills) चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 19 मिलें काम कर रही थीं।
राज्यवार उत्पादन का हाल
Uttar Pradesh:
89.65 लाख टन उत्पादन, जो पिछले साल के 92.40 लाख टन से कम है। राज्य की सभी मिलें अब बंद हो चुकी हैं।
Maharashtra:
99.2 लाख टन उत्पादन, पिछले साल के 80.93 लाख टन से काफी ज्यादा।
Karnataka:
48.01 लाख टन उत्पादन, जो पिछले साल के 40.40 लाख टन से अधिक है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में मुख्य सीजन खत्म हो चुका है, लेकिन स्पेशल सीजन (June–July 2026) में कुछ मिलें दोबारा चल सकती हैं।
Tamil Nadu में भी कुछ मिलें ऑफ-सीजन में काम जारी रखेंगी।
आमतौर पर इन राज्यों से ऑफ-सीजन में करीब 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी का उत्पादन होता है।
MSP बढ़ाने की मांग क्यों?
चीनी उद्योग का कहना है कि:
उत्पादन लागत (Production Cost) तेजी से बढ़ रही है
एक्स-मिल कीमतें (Ex-mill Prices) कमजोर बनी हुई हैं
मिलों के पास कैश फ्लो की कमी है
इन कारणों से किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा।
किसानों का बकाया बढ़ा
महाराष्ट्र में ही गन्ना किसानों का बकाया (Cane Arrears)
₹2,130 करोड़ पहुंच गया है
पिछले साल इसी समय यह सिर्फ ₹752 करोड़ था
इससे साफ है कि मिलों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर
ISMA ने सरकार से Ethanol Blending Programme को और तेज करने की मांग की है।
अभी लक्ष्य E20 (20% blending) का है
उद्योग चाहता है कि इसे बढ़ाकर
E22, E25, E27 और E85/E100 तक ले जाया जाए
भारत की कुल एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है, जिसमें grain-based ethanol भी शामिल है।
Flex-Fuel Vehicles और GST सुधार की मांग
उद्योग ने यह भी सुझाव दिए:
Flex-Fuel Vehicles को तेजी से लॉन्च किया जाए
एथेनॉल पर GST में सुधार (GST Rationalisation) किया जाए
इससे एथेनॉल की मांग और खपत बढ़ेगी
नीतिगत देरी से बढ़ी परेशानी
एथेनॉल की कीमत तय करने में देरी
कम आवंटन (Allocation)
डिस्टिलेशन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा
इससे मिलों की आय प्रभावित हो रही है और किसानों के भुगतान में देरी हो रही है। उद्योग का मानना है कि अगर जल्द MSP बढ़ाया गया और एथेनॉल नीति में सुधार हुआ तो, मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी,किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा घरेलू चीनी बाजार स्थिर रहेगा।
देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को भी बढ़ावा मिलेगा
चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन MSP Revision, एथेनॉल नीति और वित्तीय सुधारों के बिना यह बढ़ोतरी उद्योग और किसानों दोनों के लिए लाभकारी साबित नहीं हो पाएगी। आने वाले समय में सरकार के फैसले इस पूरे सेक्टर की दिशा तय करेंगे।
