नई दिल्ली: दिल्ली की 135 साल पुरानी केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी (Central Secretariat Library) को स्थानांतरित किए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक किताबें मौजूद हैं और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत शास्त्री भवन को हटाए जाने की संभावनाओं के बीच इसके भविष्य को लेकर सवाल उठे थे। इस मामले की सुनवाई सोमवार, 5 अक्टूबर को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को “In Re: 135-Yr-Old Library 8.5 Lakh Books– And No Room In The New Central Vista Plan” नाम से दर्ज किया गया है। यह मामला 3 अक्टूबर को स्वत: संज्ञान के आधार पर पंजीकृत किया गया। कोर्ट की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब लाइब्रेरी के लिए नई जगह और उसकी विशाल पुस्तक संग्रह को सुरक्षित रखने को लेकर चिंता जताई जा रही थी।
रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
यह मामला 29 सितंबर को प्रकाशित एक की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में बताया गया था कि शास्त्री भवन में संचालित केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत भवन को हटाए जाने की स्थिति में दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ सकता है। इस दौरान सबसे बड़ा सवाल लाइब्रेरी के 8.5 लाख से ज्यादा पुस्तकों के संग्रह को सुरक्षित रखने और इसके लिए उपयुक्त भवन उपलब्ध कराने को लेकर था।
केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी करीब 135 वर्षों से सरकारी दस्तावेजों, पुस्तकों और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री का संग्रह केंद्र रही है। ऐसे में इसके स्थानांतरण के साथ पुस्तक संग्रह की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर भी विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
सरकार ने कहा- लाइब्रेरी के लिए जगह तय है
वहीं, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने लाइब्रेरी के लिए जगह नहीं होने से जुड़ी खबरों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना के तहत केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी के लिए स्थान निर्धारित किया गया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि लाइब्रेरी के निर्माण की आवश्यक प्रक्रिया चल रही है।
इस तरह एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने लाइब्रेरी के स्थानांतरण और उसके भविष्य से जुड़े मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई तय की है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि नई योजना में लाइब्रेरी के लिए जगह का प्रावधान किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इस संबंध में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

